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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 120 · 128/142

कीर्तन 101–134

कीर्तन 120 · Kirtan 120

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

42 source linesपुस्तक पृष्ठ 300–302PDF 317–319

मोरा चोरा चित काहे चोरी चोरी चितचोर।

(नथवारी रंगीली...)

मोरा चोरा चित काहे चोरी चोरी चितचोर।

मैं तो हती सीधी साधी भोरी भारी चितचोर।

तूने मुरली बजाई ऐसी कैसी चितचोर।

मैं तो गई तन मन सब हार चितचोर।

Source page 301

मैं तो बिकि गइ बिनुहिं दाम चितचोर।

मैं तो लुटि गइ धुनि सुनतहिं चितचोर।

मैंने तेरा क्या बिगारा था लुटेरा चितचोर।

घर की रही न घाट की मैं अब चितचोर।

मन बिनु तो भवन लागे वन चितचोर।

नहिं भाये अब सुत पितु पति चितचोर।

दृग कह दिखला दे मोहिं मेरा चितचोर।

श्रुति कह पुनि मुरलि सुना दे चितचोर।

नासिका दिव्य तनु गंध माँगे चितचोर।

रसना कह अधर पिला दे चितचोर।

कासोँ कहूँ कैसे कहूँ कहाँ जावूँ चितचोर।

न तो मरूँ न तो जिवूँ ऐसी दशा चितचोर।

हिय उठति हूक पुनि पुनि चितचोर।

दिन चैन न नींद रैन चितचोर।

लोग कहें मोहिं बावरी भई चितचोर।

मैं तो अच्छी भली खाती पीती हती चितचोर।

मैं तो हँसती हँसाती रहती थी चितचोर।

तूने ऐसा जादू किया सब भूली चितचोर।

मन बिनु कैसे करूँ गृह कर्म चितचोर।

Source page 302

पति को बताऊँ कैसे जार प्रेम चितचोर।

सास बड़ी तेज मारे बेलन चितचोर।

अब तो जो था होना सो हुआ चितचोर।

इक बार और मुरलि सुना दे चितचोर।

लागी छूटे नहिं चाहे जिया जाय चितचोर।

अब तो धरा है सिर ओखलि चितचोर।

याते चोट का न डर मोहिं अब चितचोर।

सुना तोरा चितचोरा प्यारी जू ने चितचोर।

याते खीझि तू भी सब चित चोरे चितचोर।

लोक में भी है कहावत यह चितचोर।

धोबी से न जीते गधे को ही मारे चितचोर।

ऐसे तू भी हारा प्यारी जू ते पिय चितचोर।

याते सब गोपिन चित चोरे चितचोर।

ले जा ले जा और जो भी चाहे ले जा चितचोर।

तन मन तो गया ही प्राण ले जा चितचोर।

मुरलि ने किया हाल जब ऐसा चितचोर।

जब तू मिलेगा जाने क्या करेगा चितचोर।

मेरा भी तो तू “कृपालु” चित चोर चितचोर॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २128
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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