कीर्तन 101–134
कीर्तन 131 · Kirtan 131
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
सो छबीली छबि छली अति छल बलिया।
सो छबीली छबि छली अति छल बलिया।
विधि हरि हर को भी जो छला छलिया।
छला गया सो छबीली छवि ते छलिया।
उमा रमा आदि को भी जो छला छलिया।
छला गया सो छबीली छवि ते छलिया।
छला गया सो छबीली छवि ते छलिया।
शुकदेव मुनि को भी जो छला छलिया।
छला गया सो छबीली छवि ते छलिया।
छला गया सो छबीली छवि ते छलिया।
ब्रह्मलीन जन को भी जो छला छलिया।
छला गया सो छबीली छवि ते छलिया।
Source page 327
छला गया सो छबीली छवि ते छलिया।
ब्रज गोपी जन को भी जो छला छलिया।
छला गया सो छबीली छवि ते छलिया।
ब्रज गोप जन को भी जो छला छलिया।
छला गया सो छबीली छवि ते छलिया।
ब्रज वासी जन को भी जो छला छलिया।
छला गया सो छबीली छवि ते छलिया।
ब्रह्म ज्ञानी जन को भी जो छला छलिया।
छला गया सो छबीली छवि ते छलिया।
शुद्ध बुद्ध जन को भी जो छला छलिया।
छला गया सो छबीली छवि ते छलिया।
छला गया सो छबीली छवि ते छलिया।
छला गया सो छबीली छवि ते छलिया।
मुक्त मुनि जन को भी जो छला छलिया।
छला गया सो छबीली छवि ते छलिया।
Source page 328
काम अरु रति को भी जो छला छलिया।
छला गया सो छबीली छवि ते छलिया।
ब्रज लता पता को भी जो छला छलिया।
छला गया सो छबीली छवि ते छलिया।
केकी कोक कीर को भी जो छला छलिया।
छला गया सो छबीली छवि ते छलिया।
सब शुद्ध मन वालों को छला छलिया।
छला गया सो छबीली छवि ते छलिया।
