कीर्तन 101–134
कीर्तन 102 · Kirtan 102
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
तूने अब लौं छला मोहिं वो छलिया।
तूने अब लौं छला मोहिं वो छलिया।
अब आवूँ न छलाई में तेरी छलिया।
तेरे जन ने बताया तेरा छल छलिया।
तूने लगा दिया मेरे पाछे माया छलिया।
माया तो है तेरी दासी तेरी शक्ति छलिया।
माया ते तो हारे विधि हरि हर छलिया।
माया ने भुलाया मेरा तू मैं तेरा छलिया।
माया ने भुलाया ज्ञानिहुँ ज्ञान छलिया।
मैं तो अति तुच्छ जीव तेरा शिशु छलिया।
यामें कहा दोष मेरा तू बता दे छलिया।
जग शिशु भी न जाने माता पिता छलिया।
कहा शिशु कोई फेंके कूड़ेदान छलिया।
जग माता पिता पाले वाय शिशु छलिया।
पुनि माता पिता ही जनावे नाता छलिया।
Source page 257
ऐसे तूने भी छला है दै खिलौना छलिया।
सारा अग जग है खिलौना तेरा छलिया।
देखने का है खिलौना अगनित छलिया।
सुनने का है खिलौना अगनित छलिया।
सूँघने का है खिलौना अगनित छलिया।
रस लेने का खिलौना अगनित छलिया।
स्पर्शहूँ का खिलौना अगनित छलिया।
अगनित ब्रह्माण्ड खिलौना छलिया।
जग माँ को तो था और घर काम छलिया।
याते कछु काल को ही दे खिलौना छलिया।
जग माँ तो करि घर काम आवे छलिया।
छीनि के खिलौना दूध पिलावे छलिया।
तू तो सदा रहे मेरे पास उर छलिया।
तू तो सदा रहे सर्वव्यापक छलिया।
पुनि तू तो सत्य-संकल्प भी है छलिया।
पुनि क्यों नहिं छीना ये खिलौना छलिया।
क्यों प्रेम सुधा न पिलाया छलिया।
Source page 258
तोहिं दया नहिं आई कैसी माता छलिया।
तेरा कितना कठोर है हृदय छलिया।
तू है साँचो कुलिशहुँ ते कठोर छलिया।
तेरे सुत को सताये तेरी दासी छलिया।
उर बैठे बैठे देखे नहिं रोके छलिया।
अब जाना पहिचाना तेरा छल छलिया।
अब जग का खिलौना नहिं भाये छलिया।
तू तो है बिनु हेतु सनेही छलिया।
