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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 102 · 110/142

कीर्तन 101–134

कीर्तन 102 · Kirtan 102

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

47 source linesपुस्तक पृष्ठ 256–258PDF 273–275

तूने अब लौं छला मोहिं वो छलिया।

(नथवारी रंगीली...)

तूने अब लौं छला मोहिं वो छलिया।

अब आवूँ न छलाई में तेरी छलिया।

तेरे जन ने बताया तेरा छल छलिया।

तूने लगा दिया मेरे पाछे माया छलिया।

माया तो है तेरी दासी तेरी शक्ति छलिया।

माया ते तो हारे विधि हरि हर छलिया।

माया ने भुलाया मेरा तू मैं तेरा छलिया।

माया ने भुलाया ज्ञानिहुँ ज्ञान छलिया।

मैं तो अति तुच्छ जीव तेरा शिशु छलिया।

यामें कहा दोष मेरा तू बता दे छलिया।

जग शिशु भी न जाने माता पिता छलिया।

कहा शिशु कोई फेंके कूड़ेदान छलिया।

जग माता पिता पाले वाय शिशु छलिया।

पुनि माता पिता ही जनावे नाता छलिया।

छले जग माँ भी ज्यों निज शिशु छलिया।

दै खिलौना चट्टू घुनघुना आदि छलिया।

Source page 257

ऐसे तूने भी छला है दै खिलौना छलिया।

सारा अग जग है खिलौना तेरा छलिया।

देखने का है खिलौना अगनित छलिया।

सुनने का है खिलौना अगनित छलिया।

सूँघने का है खिलौना अगनित छलिया।

रस लेने का खिलौना अगनित छलिया।

स्पर्शहूँ का खिलौना अगनित छलिया।

अगनित ब्रह्माण्ड खिलौना छलिया।

जग माँ को तो था और घर काम छलिया।

याते कछु काल को ही दे खिलौना छलिया।

जग माँ तो करि घर काम आवे छलिया।

छीनि के खिलौना दूध पिलावे छलिया।

तू तो सदा रहे मेरे पास उर छलिया।

तू तो सदा रहे सर्वव्यापक छलिया।

पुनि तू तो सत्य-संकल्प भी है छलिया।

पुनि क्यों नहिं छीना ये खिलौना छलिया।

क्यों प्रेम सुधा न पिलाया छलिया।

क्यों निज उर ते न लगाया छलिया।

चौरासी लख द्वार घुमाया छलिया।

Source page 258

बीते अगनित जनम भ्रमत छलिया।

तोहिं दया नहिं आई कैसी माता छलिया।

तेरा कितना कठोर है हृदय छलिया।

तू है साँचो कुलिशहुँ ते कठोर छलिया।

तेरे सुत को सताये तेरी दासी छलिया।

उर बैठे बैठे देखे नहिं रोके छलिया।

अब जाना पहिचाना तेरा छल छलिया।

अब जग का खिलौना नहिं भाये छलिया।

तू तो है बिनु हेतु सनेही छलिया।

तू तो बिनु सेवा द्रवे दीन पर छलिया।

मोहिं सीने से लगा ले वो “कृपालु” छलिया॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २110
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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