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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 45 · 53/142

कीर्तन 1–50

कीर्तन 45 · Kirtan 45

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

25 source linesपुस्तक पृष्ठ 119–120PDF 136–137

जोइ अलबेली सरकार, सोइ प्रेम सुधा रस सार।

(हैं बाँको सुन्दर...)

जोइ अलबेली सरकार, सोइ प्रेम सुधा रस सार।

जोइ जीवन प्राणाधार, सोइ मम स्वामिनि सुकुमार॥

जेहि सेवत नँदकुमार, जेहि छवि पर छवि बलिहार।

जेहि लखि मुर्छित रिझवार, सोइ मम स्वामिनि सुकुमार॥

सिर कनक मुकुट छविदार, भल चारु चंद्रिका धार।

सिर शीश फूल बलिहार, सोइ मम स्वामिनि सुकुमार॥

वेणी कारी घुँघरार, सिर चूनरि जरिन किनार।

Source page 120

श्रुति कर्ण फूल बलिहार, सोइ मम स्वामिनि सुकुमार॥

रस भरे नैन रतनार, नैनन बिच काजर डार।

चितवनि लखि पिय बलिहार, सोइ मम स्वामिनि सुकुमार॥

नासा भल बेसर धार, नथ मोतिन लर छविदार।

मृदु मुसकनि छवि बलिहार, सोइ मम स्वामिनि सुकुमार॥

कर मणिमय कंकण धार, करपत्र चुरी छविदार।

पहुँची छवि चारु निहार, सोइ मम स्वामिनि सुकुमार॥

भुज बाजूबंद निहार, अँगुरिन मणि मुँदरिन धार।

मेंहदी करतल बलिहार, सोइ मम स्वामिनि सुकुमार॥

गर मणि मुक्तन को हार, दुलरी तिलरी छविदार।

लखि कंचुकि पिय बलिहार, सोइ मम स्वामिनि सुकुमार॥

कटि मणि किंकिणि रिझवार, किंकिणि रुनझुन झनकार।

नीलाम्बर छवि छविदार, सोइ मम स्वामिनि सुकुमार॥

पग मणिमय नूपुर धार, जावक छवि अरुण निहार।

अँगुरिन बिछुवनि छविदार, सोइ मम स्वामिनि सुकुमार॥

बह रोम रोम रस धार, जेहि पियत रहत रिझवार।

जोइ दीनन की रखवार, सोइ मम “कृपालु” सरकार॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २053
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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