कीर्तन 101–134
कीर्तन 104 · Kirtan 104
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
तोसों नहिं बोलूँ जारे जारे हरजाई।
तोसों नहिं बोलूँ जारे जारे हरजाई।
मैंने प्रीति लगाई तो सों भल भरि पाई।
मैंने प्रथम न जानी तोहिं याते ठगाई।
मैं तो थी भोरी भारी तोरी बातों में आई।
तूने तो मोते मीठी मीठी बात बनाई।
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झूठी मूठी मीठी बतियन मोहिं भुराई।
तोसों उऋण न हौं ह्वै कबहुँ सकाई।
अब तजि तृण सम गये मोहिं भुलाई।
तोरी रमा भोरी जो तोरी बातों में आई।
कालि उनहुँन तजि पुनि और कहुँ जाई।
अब लौं तो सही अब सहि नहिं जाई।
तेरे मन में तो रह नित कपट खटाई।
तू का जाने निष्ठुर उर पीर पराई।
ब्रज में तो नहिं कोउ कुबरी लुगाई।
जाने कैसा जादू किया मो पे तूने हरजाई।
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