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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 119 · 127/142

कीर्तन 101–134

कीर्तन 119 · Kirtan 119

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

46 source linesपुस्तक पृष्ठ 298–300PDF 315–317

मोरा चित चोरा काहे तू बता दे चितचोर।

(नथवारी रंगीली...)

मोरा चित चोरा काहे तू बता दे चितचोर।

मैंने तेरा क्या बिगाड़ा था बता दे चितचोर।

मैंने भोरा भारा छोरा तोहिं जाना चितचोर।

तू तो निकलो बड़ोइ बरजोर चितचोर।

तू तो अभी छोटा सा ही है ओरे चितचोर।

बड़ा होके जाने क्या करेगा तू चितचोर।

कालि घट भर घर जा रही थी चितचोर।

तू ने मारि कांकरि घट फोर्यो चितचोर।

मैंने क्रोध से देखा पाछे तोहिँ चितचोर।

पुनि मैंने तोहिं तूने मोहिं देखा चितचोर।

तेरी आँखों में न जाने कैसा जादू चितचोर।

मैं तो मरि गइ बिनुहिं मौत चितचोर।

इकटक टकटकि लगि गई चितचोर।

मोहिं निज तनु सुधि न रही चितचोर।

तू ने उर ते लगाया मुख चूमा चितचोर।

पुनि मैं गिरी छिति मुर्छित चितचोर।

Source page 299

तू तो जाने कित भाजि गयो चितचोर।

मेरी सखि ने उठाया मोहिं तब चितचोर।

जब तनु सुधि आई तू न था चितचोर।

मेरी सखि ने बताया जो जो हुआ चितचोर।

मैं तो हो गइ तब ते बेहाल चितचोर।

अब कासों कैसे कहा कहूँ हौं चितचोर।

पग धरूँ कहूँ परे कहूँ पग चितचोर।

पुनि पुनि तनु काँपे हो पसीना चितचोर।

दृग झर झर बरसन लागे चितचोर।

उर धर न धीर कैसेहुँ चितचोर।

उर उठति पीर पुनि पुनि चितचोर।

पुनि सोइ चह दरस परस चितचोर।

फूटो घट सिर धर गई घर चितचोर।

पूछो सास ने जो कैसे फूटा घट चितचोर।

मैंने कहा लगी ठोकर गिरी चितचोर।

पुनि कही झूठ लागी चोट कटि चितचोर।

चोट तो लगी थी साँची उर मेरे चितचोर।

एक दिन लूगीं दाँव हौं हूँ तो सों चितचोर।

करि सोरहुँ सिंगार आवूँ तो पै चितचोर।

Source page 300

तकि तकि नैन बान मारुँ हौं हूँ चितचोर।

तू भी छिति गिरे मुर्छित लखूँ चितचोर।

चित चोरने का फल चाखे तब चितचोर।

तोरा चित चोरि पुनि हौं कहूँगी चितचोर।

मोरा चित दे दे ले ले निज चित चितचोर।

कोटि कोटि सखि चित चोरा तूने चितचोर।

पेट भरा नहिं अबहुँ तोर चितचोर।

जाके प्यारी जू सों कहूँगी अबहिँ चितचोर।

चलो प्यारी तुम भी चुरावो चित चितचोर।

कह छूटे न “कृपालु” बानि चोरी चितचोर॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २127
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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