कीर्तन 101–134
कीर्तन 119 · Kirtan 119
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मोरा चित चोरा काहे तू बता दे चितचोर।
मोरा चित चोरा काहे तू बता दे चितचोर।
मैंने तेरा क्या बिगाड़ा था बता दे चितचोर।
मैंने भोरा भारा छोरा तोहिं जाना चितचोर।
तू तो निकलो बड़ोइ बरजोर चितचोर।
तू तो अभी छोटा सा ही है ओरे चितचोर।
बड़ा होके जाने क्या करेगा तू चितचोर।
कालि घट भर घर जा रही थी चितचोर।
तू ने मारि कांकरि घट फोर्यो चितचोर।
मैंने क्रोध से देखा पाछे तोहिँ चितचोर।
पुनि मैंने तोहिं तूने मोहिं देखा चितचोर।
तेरी आँखों में न जाने कैसा जादू चितचोर।
मैं तो मरि गइ बिनुहिं मौत चितचोर।
मोहिं निज तनु सुधि न रही चितचोर।
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तू तो जाने कित भाजि गयो चितचोर।
मेरी सखि ने उठाया मोहिं तब चितचोर।
जब तनु सुधि आई तू न था चितचोर।
मेरी सखि ने बताया जो जो हुआ चितचोर।
मैं तो हो गइ तब ते बेहाल चितचोर।
अब कासों कैसे कहा कहूँ हौं चितचोर।
पग धरूँ कहूँ परे कहूँ पग चितचोर।
पुनि पुनि तनु काँपे हो पसीना चितचोर।
पूछो सास ने जो कैसे फूटा घट चितचोर।
मैंने कहा लगी ठोकर गिरी चितचोर।
पुनि कही झूठ लागी चोट कटि चितचोर।
चोट तो लगी थी साँची उर मेरे चितचोर।
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तकि तकि नैन बान मारुँ हौं हूँ चितचोर।
तू भी छिति गिरे मुर्छित लखूँ चितचोर।
चित चोरने का फल चाखे तब चितचोर।
तोरा चित चोरि पुनि हौं कहूँगी चितचोर।
मोरा चित दे दे ले ले निज चित चितचोर।
कोटि कोटि सखि चित चोरा तूने चितचोर।
पेट भरा नहिं अबहुँ तोर चितचोर।
जाके प्यारी जू सों कहूँगी अबहिँ चितचोर।
