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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 21 · 29/142

कीर्तन 1–50

कीर्तन 21 · Kirtan 21

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

23 source linesपुस्तक पृष्ठ 59–60PDF 76–77

तुम ही मम नंदकुमार, थे हो रहिहौ सरकार।

(हैं बाँको सुन्दर...)

तुम ही मम नंदकुमार, थे हो रहिहौ सरकार।

तुम ही मम साँचो यार, टुक हमरिहुँ ओर निहार॥

तू अंशी नंदकुमार, मैं तो हूँ अंश तिहार।

यह नात सोचु सरकार, टुक हमरिहुँ ओर निहार॥

तू शक्तिमान सरकार, मैं तो हूँ शक्ति तिहार।

तोसों ही नात हमार, टुक हमरिहुँ ओर निहार॥

तू आत्मा नंदकुमार, मैं तो हूँ देह तिहार।

यह कह तव वेद पुकार, टुक हमरिहुँ ओर निहार॥

तू ही पितु नंदकुमार, तू ही माता रिझवार।

तू ही गति मति सरकार, टुक हमरिहुँ ओर निहार॥

तू स्वामी नंदकुमार, तू ही है सखा हमार।

तू ही सुत पति सरकार, टुक हमरिहुँ ओर निहार।

तू दीनन को रखवार, तू पतितन को पतवार।

तू अधम उधारन हार, टुक हमरिहुँ ओर निहार॥

तू मन बुधि पर सरकार, कोउ पायो नहिं तव पार।

कह नेति नेति श्रुति चार, टुक हमरिहुँ ओर निहार॥

Source page 60

तव माया अपरंपार, गये विधि हरि हरहूँ हार।

हम तो अति लघु सरकार, टुक हमरिहुँ ओर निहार॥

गावूँ नित नाम तिहार, ध्यावूँ नित तोहिं सरकार।

पावूँ रति तव रिझवार, टुक हमरिहुँ ओर निहार॥

तव जन अनंत सरकार, हमरे इक तुम रिझवार।

दे दो मोहिं अपनो प्यार, टुक ओर “कृपालु” निहार॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २029
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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