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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 39 · 47/142

कीर्तन 1–50

कीर्तन 39 · Kirtan 39

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

48 source linesपुस्तक पृष्ठ 107–109PDF 124–126

सत चित आनँदघन नँदनंदन।

(नीको लागे...)

सत चित आनँदघन नँदनंदन।

नँदनंदन ही नँदनंदन तन।

देही भी देह भी नँदनंदन।

भगवान स्वयं हैं नँदनंदन।

एक अवतारी हैं नँदनंदन।

सोरह कला युक्त नँदनंदन।

षट् ऐश्वर्य युक्त नँदनंदन।

सुंदरता मूरति नँदनंदन।

रूप मधुरिमा सोइ नँदनंदन।

नटवर नागर सोइ नँदनंदन।

हैं पतितन पावन सोइ नँदनंदन।

हैं पुरुषोत्तम सोइ नँदनंदन।

हैं विश्वरूप सोइ नँदनंदन।

हैं विश्व व्याप्त सोइ नँदनंदन।

हैं विश्वेश्वर सोइ नँदनंदन।

हैं विश्व परे सोइ नँदनंदन।

Source page 108

हैं नित्य सगुण सोइ नँदनंदन।

हैं नित निर्गुण सोइ नँदनंदन।

हैं निराकार सोइ नँदनंदन।

हैं नराकार सोइ नँदनंदन।

हैं ब्रह्म प्रतिष्ठा नँदनंदन।

हैं प्रेम सुधा निधि नँदनंदन।

हैं रूप सुधा निधि नँदनंदन।

हैं ब्रजरस अंबुधि नँदनंदन।

हैं मायापति सोइ नँदनंदन।

हैं सर्वेश्वर सोइ नँदनंदन।

हैं जीवन जीवन नँदनंदन।

हैं रसिक शिरोमणि नँदनंदन।

हैं रस स्वरूप सोइ नँदनंदन।

हैं निज जन मोहन नँदनंदन।

हैं निज मन मोहन नँदनंदन।

हैं विश्व विमोहन नँदनंदन।

हैं मदन विमोहन नँदनंदन।

हैं राधा मोहन नँदनंदन।

हैं गुणातीत सोइ नँदनंदन।

Source page 109

हैं अगणित गुण युत नँदनंदन।

हैं वेद वेद्य सोइ नँदनंदन।

हैं वेदन पर सोइ नँदनंदन।

हैं जग स्रष्टा सोइ नँदनंदन।

हैं जग पालक सोइ नँदनंदन।

हैं जग संहर्ता नँदनंदन।

हैं ब्रज रसिकन धन नँदनंदन।

हैं ब्रज बनितन धन नँदनंदन।

हैं ब्रज गोपन धन नँदनंदन।

हैं प्रणत जनन धन नँदनंदन।

हैं निर्धन को धन नँदनंदन।

हैं मम “कृपालु” धन नँदनंदन॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २047
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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