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प्यारी राधा रानी ब्रज रस की खानी।
(नथवारी रंगीली...)
प्यारी राधा रानी ब्रज रस की खानी।
त्रिभुवन दानी की भी दानी।
जेहि ब्रह्म श्याम स्वामिनि मानी।
जग प्रकटावति राधा रानी।
जग का पालन कर महरानी।
जग संहारिणि राधा रानी।
अग जग व्यापक राधा रानी।
सब उर पुर बस राधा रानी।
Source page 134
अन्तर्यामिनि मम महरानी।
जग का नियमन कर ठकुरानी।
चेतन की चेतन महरानी।
जो दिव्य प्रेम रस की खानी।
सुख को दे सुख राधारानी।
निज छवि लखि मोहित महरानी।
ब्रजरस बाँटति ब्रज महरानी।
गहवर वन विहरति महरानी।
महरानी सम छवि महरानी।
विहरति वृन्दावन ठकुरानी।
रस बोरी भोरी महरानी।
दीनन रस दानी ठकुरानी।
पतितन अपनावति महरानी।
सुनि क्रन्दन भाजति महरानी।
करुणा वरुणालय ठकुरानी।
बिनु हेतु सनेहिनि महरानी।
हैं अधम उधारनि महरानी।
हैं महाभाव राधा रानी।
मादन रस युत राधा रानी।
Source page 135
अवतारी श्री राधारानी।
ह्लादिनी शक्ति राधा रानी।
कोटिन कमलादि नौकरानी।
चह पद रज ब्रह्माणी बानी।
जाकर चाकर सारँग पानी।
हरिहूँ मन हर राधा रानी।
हरिहूँ अवराधे ठकुरानी।
गोलोक स्वामिनी ठकुरानी।
वेदहुँ महिमा नहिं सक जानी।
महिमा ललितादिक सखि जानी।
सखि कृपा जान कोउ महरानी।
हैं ब्रह्म प्रतिष्ठा ठकुरानी।
जगदीश्वर हूँ कर अगवानी।
मनुहार करत सारँग पानी।
पग चापे ब्रह्म चक्रपानी।
जाके डर डरे चक्र पानी।
पग धरें मुकुट सारँग पानी।
गावें हरि नित गुन महरानी।
ध्यावें हरि नित छवि ठकुरानी।
Source page 136
चूमें हरि चरनन महरानी।
आरती करें सारँग पानी।
कर जय जयकार चक्रपानी।
हरि लख अपलक छवि महरानी।
जय जय “कृपालु” राधारानी॥
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