कीर्तन 1–50
कीर्तन 6 · Kirtan 6
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ओरी गोरी गोरी गोरी तोरी मोरी जोरी।
ओरी गोरी गोरी गोरी तोरी मोरी जोरी।
तू है ब्रह्म मैं हूँ जीव यह कैसी जोरी।
तू है विज्ञ मैं हूँ अज्ञ यह कैसी जोरी।
तू तो है नियंता मैं नियम्य हूँ गोरी।
तू तो सर्वव्यापक मैं हूँ व्याप्य गोरी।
तू तो उर प्रेरक मैं हूँ प्रेर्य गोरी।
तू तो मायाधीश मैं हूँ मायाधीन गोरी।
तू तो जग स्रष्टा मैं तो हूँ सृज्य गोरी।
Source page 16
तू तो मेरा अंशी है मैं हूँ अंश गोरी।
तू तो विभु ब्रह्म मैं हूँ अणु जीव गोरी।
तू तो मेरा द्रष्टा मैं हूँ तेरी दृश्य गोरी।
तू तो मेरा शासक मैं हूँ शास्य गोरी।
तू तो मेरा स्वामी मैं हूँ तेरी दासी गोरी।
तू तो कर्मफल दे मैं करुँ कर्म गोरी।
तू तो कर्म लिखे मैं तो कर्म करुँ गोरी।
तू तो है स्वतंत्र मैं हूँ परतंत्र गोरी।
तू तो नित्य सुखी मैं हूँ अति दुखी गोरी।
तू तो स्वप्रकाश मैं प्रकाशित गोरी।
तू तो परतत्व मैं हूँ अपर गोरी।
तू है देही देह इक मैं हूँ भिन्न गोरी।
तू है आश्रय मैं हूँ आश्रित गोरी।
तू है सर्वकारण मैं हूँ कार्य गोरी।
तू है चिन्मय मैं हूँ मायिक गोरी।
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तू है पूर्णकाम मैं हूँ अति कामी गोरी।
तू है प्रेमदाता मैं हूँ भिखारी गोरी।
तू है परमात्मा मैं हूँ जीव गोरी।
तू है मेरा भर्ता मैं हूँ भृत्या गोरी।
तू है माता पिता मैं हूँ पुत्री गोरी।
तू है भगवान मैं तो बिनु भग गोरी।
तू तो चाहे मोहिं मैं न चाहूँ तोहिं गोरी।
