कीर्तन 101–134
कीर्तन 103 · Kirtan 103
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
तोहिं कहा भयो सखि मोहिं काहे न बताय।
तोहिं कहा भयो सखि मोहिं काहे न बताय।
Source page 259
काहे तेरा तनु काँपे बार बार बताय।
सपने में लखि सखि भूत गई डरपाय।
काहे निकसे पसीना तेरे तनु ते बताय।
डर ते ही निकसे पसीना भूत सुधि आय।
काहे लंबी लंबी सांस लेय यह तो बताय।
सखि सीखूँ प्राणायाम इक योगी ने सिखाय।
काहे पुनि पुनि आवे आँसू दृगन बताय।
पति विरह सतावे याते दृग आँसू आय।
पति सुख सोचूँ तब सखि ऐसो ह्वै जाय।
काहे गिरि छिति मुरछित कहे श्याम हाय।
पति को ही कहूँ प्यार ते मैं श्याम सदाय।
जा जा जा जा झूठी काहे मोते बात बनाय।
मैंने जानी तेरे मन भाय गयो बलभाय।
तूने लिया होगा वाते निज नैन लड़ाय।
Source page 260
मोय भी वाने दियो सोइ रोग लगाय।
यह जार प्रेम रोग सखि कासों बताय।
पुनि कहाँ लौं कब लौं याय छुपाय।
उठे हूक पुनि पुनि जब जब सुधि आय।
अब घर वारे मोहिं सब अरि सों लखाय।
दिन जैसे तैसे बीते रैन कैसे बिताय।
सासु पूछे तोरा मन कहाँ जाय बताय।
वाते बोलूँ झूठ माता पिता सुरति सताय।
मै भी तो हूँ प्रेम रोगी पुनि तोहिं का बताय।
मीठी इतनी है वेदना कि छोड़ी नहिं जाय।
