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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 103 · 111/142

कीर्तन 101–134

कीर्तन 103 · Kirtan 103

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

40 source linesपुस्तक पृष्ठ 258–260PDF 275–277

तोहिं कहा भयो सखि मोहिं काहे न बताय।

(नथवारी रंगीली...)

तोहिं कहा भयो सखि मोहिं काहे न बताय।

मैं तो तोरी साँची सखी मोते काहे छुपाय।

मोय कछू न भयो तोय कहा दूँ बताय।

Source page 259

काहे मौन बिसूरति रहति बताय।

सखि पति परदेसिहिं सुरति सताय।

काहे तेरा तनु काँपे बार बार बताय।

सपने में लखि सखि भूत गई डरपाय।

काहे निकसे पसीना तेरे तनु ते बताय।

डर ते ही निकसे पसीना भूत सुधि आय।

काहे लंबी लंबी सांस लेय यह तो बताय।

सखि सीखूँ प्राणायाम इक योगी ने सिखाय।

काहे पुनि पुनि आवे आँसू दृगन बताय।

पति विरह सतावे याते दृग आँसू आय।

काहे तेरी वाणी गदगद होय बताय।

पति सुख सोचूँ तब सखि ऐसो ह्वै जाय।

काहे गिरि छिति मुरछित कहे श्याम हाय।

पति को ही कहूँ प्यार ते मैं श्याम सदाय।

जा जा जा जा झूठी काहे मोते बात बनाय।

मैंने जानी तेरे मन भाय गयो बलभाय।

तूने लिया होगा वाते निज नैन लड़ाय।

मारा होगा नैन बान तान वाय बलभाय।

तेरे तनु आठ सात्विक भाव प्रकटाय।

Source page 260

मोय भी वाने दियो सोइ रोग लगाय।

यह जार प्रेम रोग सखि कासों बताय।

पुनि कहाँ लौं कब लौं याय छुपाय।

उठे हूक पुनि पुनि जब जब सुधि आय।

रोकत हूँ मुख ते निकसे हाय।

अब घर आँगन मोहिं कछु न सुहाय।

अब घर वारे मोहिं सब अरि सों लखाय।

दिन जैसे तैसे बीते रैन कैसे बिताय।

करवट बदलत बदलत रैन जाय।

सासु पूछे तोरा मन कहाँ जाय बताय।

वाते बोलूँ झूठ माता पिता सुरति सताय।

ऐसे कब तक चलेगा सखि समुझाय।

मै भी तो हूँ प्रेम रोगी पुनि तोहिं का बताय।

इक बात अजूबी येहि रोगहिं आय।

मीठी इतनी है वेदना कि छोड़ी नहिं जाय।

उतनी ही आवे सुधि जितनोइ बिसराय।

लागी छूटे न “कृपालु” जिय जाय तो जाय॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २111
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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