लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content

ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 46 · 54/142

कीर्तन 1–50

कीर्तन 46 · Kirtan 46

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

17 source linesपुस्तक पृष्ठ 121PDF 138

ठकुरानी राधा रानी प्रेम सुख दानी,

(तू ही तू ही...)

ठकुरानी राधा रानी प्रेम सुख दानी,

करें अगवानी जाकी सारँग पानी।

वृन्दावन महरानी अवढर दानी,

पूर्ण ब्रह्म श्यामहूँ ने स्वामिनि मानी।

दिव्य प्रेम दिव्य रूप दिव्य रस खानी,

गुरु की कृपा ते राधा तत्व हम जानी।

जाकी नौकरानी कोटि बानी भवानी,

जाकी महिमा चारों श्रुतिहूँ न जानी।

जाको पार पायो नहिं ब्रह्म चक्रपानी,

जाकी दिव्य वृन्दावन रजधानी।

जाको नेति नेति कहि गावे वेद वानी,

करें मनुहार ब्रह्म श्याम जोरि पानी।

धोवें पग जाको दृग जल चक्र पानी,

जाको माँगे प्रेम श्याम त्रिभुवन दानी।

जग दाता श्याम श्याम दाता ठकुरानी,

मेरी सरकार हैं “कृपालु” महरानी।

ब्रज रस माधुरी · भाग २054
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

Related official book listing · Official full collection · Official author website · Read as text