कीर्तन 1–50
कीर्तन 46 · Kirtan 46
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ठकुरानी राधा रानी प्रेम सुख दानी,
ठकुरानी राधा रानी प्रेम सुख दानी,
पूर्ण ब्रह्म श्यामहूँ ने स्वामिनि मानी।
दिव्य प्रेम दिव्य रूप दिव्य रस खानी,
गुरु की कृपा ते राधा तत्व हम जानी।
जाकी महिमा चारों श्रुतिहूँ न जानी।
जाको पार पायो नहिं ब्रह्म चक्रपानी,
जाको नेति नेति कहि गावे वेद वानी,
करें मनुहार ब्रह्म श्याम जोरि पानी।
धोवें पग जाको दृग जल चक्र पानी,
जाको माँगे प्रेम श्याम त्रिभुवन दानी।
