कीर्तन 51–100
कीर्तन 87 · Kirtan 87
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मोहिं मारे जनि मैं न माटी खायो मैया।
मोहिं मारे जनि मैं न माटी खायो मैया।
तनु काँपे थर थर लखि साँटी मैया।
तनु निकसे पसीना लखि साँटी मैया।
मैंने माटी को तो छुवा भी न मेरी मैया।
तू तो जाने मैं न बोलूँ कभू झूठ मैया।
ग्वाल बाल सब मेरे बैर परे मैया।
चाहे जिसकी खिला ले तू कसम मैया।
कान्ह कभू देखें साँटी कभू मुख मैया।
दाऊ भी तो कह माटी खायो कह मैया।
दाऊ भैया भी मिले हैं ग्वाल सँग मैया।
तू ने कहा था न देखो परदोष मैया।
तू कहे तो दोष सब का बता दूँ मैया।
Source page 219
तू तो खेल्यो करियो तूने कहा मैया।
काउ गैया मारे लात तूने कहा मैया।
आज कही भैया गैया घेरि लावो मैया।
मैंने मानी नहिं भैया तब कही मैया।
चलु घर तोहिं पिटवावूँ कहि मैया।
आजु पुनि पुनि हारे ग्वाल खेल मैया।
याते ग्वाल बाल भी थे खिसियाये मैया।
तू न मान तो ले लखु मोरा मुख मैया।
कान्हा सोचे अब नहिं मोहिं मारे मैया।
अब करि लेगी मेरा विश्वास मैया।
किंतु खोल मुख देखूँ ऐसा कह मैया।
कान्हा सोचे मुख खोलूँ जो तो मारे मैया।
नहिं खोलूँ यदि मुख तो भी मारे मैया।
Source page 220
गिरी साँटी कर निज दृग मूँदे मैया।
यह कान्ह है कोई देव सोचे मैया।
वाने मैया ने जो देखा सो भुलाया मैया।
पुनि उर ते कन्हैया को लगाया मैया।
बार बार चिपटाया मुख चूमा मैया।
