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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 54 · 62/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 54 · Kirtan 54

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

41 source linesपुस्तक पृष्ठ 140–142PDF 157–159

बलि बलि अलबेली सरकार।

(नीको लागे...)

बलि बलि अलबेली सरकार।

सिंहासन बैठी सुकुमार।

चापत चरनन नंदकुमार।

विधि हरि हर कर जय जय कार।

आनँद घन तन भानुदुलार।

चंपक वरन गौर सरकार।

श्यामा ब्रह्म सगुण साकार।

श्यामा स्वामिनि नंदकुमार।

ब्रजरस नित बाँटति सुकुमार।

पियत सखिन सँग पिय रिझवार।

सखि किय तनु सोरह शृंगार।

सखि कह बार बार बलिहार।

Source page 141

श्यामा प्रेम रूप रस सार।

अनुपम शोभा सिंधु अपार।

सब सुवासि वासित जल धार।

तासों मज्जन किय सुकुमार।

लेप अरगजा तनु बलिहार।

गोरे तनु नीलाम्बर धार।

उर कंचुकि कुसुंभि रंग धार।

सिर पर चूनरि जरिन किनार।

तेल फुलेलन केश सँवार।

माँग भरी सिंदूर निहार।

बिन्दी इंदु भाल अरुणार।

कजरारे दृग काजर डार।

सुरमा सुघर दृगन लिय डार।

अधर कपोल राग अरुणार।

बीरी पान दशन अरुणार।

चिबुक एक तिल भल बलिहार।

गल मणि मुक्तन हीरन हार।

अंग अंग आभूषण धार।

दोउ कर मेंहदी अरुण सँवार।

Source page 142

चरण मिहावरि अरुण निहार।

लाजति छवि लखि छवि सुकुमार।

लखि शृंगार लजत शृंगार।

इकटक लगी टकटकि रिझवार।

सखि सँग आरति कर रिझवार।

धन्य धन्य वृषभानुदुलार।

धन्य धन्य ब्रजराजकुमार।

धन्य धन्य सिगरी ब्रजनार।

धन्य “कृपालुहुँ” करु सुकुमार॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २062
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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