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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 128 · 136/142

कीर्तन 101–134

कीर्तन 128 · Kirtan 128

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

49 source linesपुस्तक पृष्ठ 318–320PDF 335–337

कीरति सोँ कुँवरि कहति तुतुराय।

(नीको लागे...)

कीरति सोँ कुँवरि कहति तुतुराय।

कर चिबुक पकरि कह सुनु टुक माय।

खेलति रहि आज वाटिका माय।

सँग रहि ललितादिक सखि समुदाय।

आई तहँ कई ब्रज युवतिन माय।

पुनि लखी मोय सब नख शिख माय।

मोहीं कहँ घूरि घूरि लख माय।

पुनि लगी कान कछु सब बतराय।

मुरि मुरि सब देखें मोय माय।

हौँ कही कान ललिता सों माय।

ये जादूगरनी मोय जनाय।

Source page 319

अब हम सब द्रुत इत ते भजि जाय।

मेरो हिय करे धक धक लखि वाय।

पुनि कह यह लाली अनुपम आय।

याको तो लखि उर्वशी लजाय।

लाला भी ऐसेहि अनुपम आय।

वाको भी तो लखि काम लजाय।

लाला लाली जोरी भल भाय।

इमि कहि सब युवतिन गईं घर माय।

यह जोरी कौन बलाय माय।

यह लाला कौन कहाँ रह माय।

मेरो मन तो डरपाय माय।

यह बात बेगि समुझाय माय।

लाली लाला नँदलाल कहाय।

लाली नँद गाम कहाय वाय।

वाते तब ब्याहु करन चह वाय।

वा छवि सम छवि तेरी ही आय।

तू भोरी काहे को डरपाय।

यह तो अति शुभ संदेश कहाय।

तू भी जा सखि सँग हर्ष मनाय।

Source page 320

कह कुँवरि ब्याहु कब होय माय।

अबहिं करि दे मम ब्याहु माय।

तू पाँच बरस की अबहिं आय।

हो अबहिं सगाई तोय वाय।

कब होय सगाई मोरि माय।

करि दे न सगाई अबहिं माय।

ऊँ ऊँ करि लाली पग पटकाय।

पुनि दोउ कर खींचत वेणी माय।

कलि दे न थगाई कह तुतुराय।

पहले वे करें बात इत आय।

तब नाता भी पक्का ह्वै जाय।

मंगल मुहूर्त पंडित बतलाय।

तब होगी तोरि सगाई वाय।

जा जा जा खेलु अबहिं कह माय।

ललितादिक सखि सुनु तोहिं बुलाय।

जब होय सगाई लउँ बुलवाय।

गइ कुँवरि कहत मोहिँ बेगि बुलाय।

भोरेपन पर “कृपालु” बलि जाय॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २136
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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