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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 42 · 50/142

कीर्तन 1–50

कीर्तन 42 · Kirtan 42

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

42 source linesपुस्तक पृष्ठ 112–114PDF 129–131

ऐसी अलबेली सरकार।

(नीको लागे...)

ऐसी अलबेली सरकार।

जैसी नहिं कहुँ विश्व मझार।

देही दास देह उर धार।

देही आत्मा वेद पुकार।

लख चौरासी देह प्रकार।

आत्मा हूँ श्रुति देह उचार।

जाकी आत्मा नंदकुमार।

श्यामहुँ जाकी देह उचार।

सो आत्मा वृषभानुदुलार।

भजत चराचर नंदकुमार।

Source page 113

सोउ भज श्री वृषभानुदुलार।

सेव्या स्वामिनि भानुदुलार।

सेवक तो हैं नंदकुमार।

ह्लादिनि शक्ति सारहूँ सार।

मादन रस स्वरूप सुकुमार।

सत चित सुख घन तनु सुकुमार।

राधा प्रेम रूप रस सार।

राधा कृपा शक्ति साकार।

रोम रोम बह ब्रजरस धार।

पियत अनवरत नंदकुमार।

राधा छवि पर छवि बलिहार।

राधा पर राधा बलिहार।

सिंहासन बैठीं सुकुमार।

चापत चरनन नंदकुमार।

जब चल सखिन सँग सुकुमार।

पाछे चल हरि करि जयकार।

लखि स्वामिनि सोरह शृंगार।

पुनि पुनि कहत श्याम बलिहार।

जहँ कोउ राधा नाम उचार।

Source page 114

तहँ आवत भजि नंदकुमार।

गोपिन करत रहत मनुहार।

महल टहल याचत रिझवार।

कबहुँ कबहुँ दे दें ब्रजनार।

राधा राधा जप रिझवार।

राधा ध्यान करत रिझवार।

राधा सुख चह नंदकुमार।

राधा जन सों कर अति प्यार।

राधा गुन गावत बलिहार।

राधा भृकुटि तकत रिझवार।

राधा मान डरत रिझवार।

मोहिँ “कृपालु” करु सखि सुकुमार॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २050
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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