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ब्रज रस माधुरी

PART II · Front matter · 7/142

प्रारम्भिक पृष्ठ

पुस्तक परिचय · About the book

12 source linesप्रारम्भिक पृष्ठPDF 8

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

वर्तमान काल में जगद्गुरु स्वामि श्री कृपालु जी महाराज

विश्व के इतिहास में पंचम जगद्गुरु हैं। ये समन्वयवादी जगद्गुरु

हैं अतएव ये पूर्ववर्ती समस्त आचार्यों (जगद्गुरु निम्बार्काचार्य,

जगद्गुरु रामानुजाचार्य, जगद्गुरु माध्वाचार्य एवं चैतन्यदेव)

के दार्शनिक सिद्धान्तों को सही सिद्ध करते हुए अपना समन्वयवादी

दर्शनिक सिद्धान्त प्रस्तुत करते हैं। इनके मतानुसार यद्यपि

ईश्वर- प्राप्ति के अनेक मार्ग हैं तथापि भक्ति ही सर्वश्रेष्ठ तथा

सर्वसुलभ मार्ग है, प्रत्येक जीव का लक्ष्य स्वसुखवासनागंधलेश-

शून्य श्रीकृष्ण सुखैक तात्पर्यमयी सेवा ही है। इस लक्ष्य की

प्राप्ति हेतु श्रवण, कीर्तन, स्मरण तीन प्रकार की प्रमुख भक्ति

करनी होगी।

ब्रज रस माधुरी · भाग २007
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Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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