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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 26 · 34/142

कीर्तन 1–50

कीर्तन 26 · Kirtan 26

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

41 source linesपुस्तक पृष्ठ 69–71PDF 86–88

तेरे अगनित गुन गन नँदनंदन।

(नीको लागे...)

तेरे अगनित गुन गन नँदनंदन।

तेरे अगनित नामहुँ नँदनंदन।

तेरे अगनित रूपहुँ नँदनंदन।

तेरे अगनित धामहुँ नँदनंदन।

तेरे अगनित जनहूँ नँदनंदन।

तेरी अगनित लीला नँदनंदन।

तेरे अगनित जग हैँ नँदनंदन।

तू ही जग को प्रकट करे नँदनंदन।

तू ही जग पालन करे नँदनंदन।

तू ही जग का प्रलय करे नँदनंदन।

तू ही सब उर पुर बसे नँदनंदन।

तू ही जीवन जीवन नँदनंदन।

तू है जड़ जग व्यापक नँदनंदन।

तू है चेतन व्यापक नँदनंदन।

तू है नाम में बैठा नँदनंदन।

तू है धाम में बैठा नँदनंदन।

Source page 70

तू है जन में भी बैठा नँदनंदन।

तू तो सर्व द्रष्टा है नँदनंदन।

तू तो अंतर्यामी नँदनंदन।

तू तो सब उर प्रेरक नँदनंदन।

तू तो जग का शासक नँदनंदन।

तू तो सतघन चितघन नँदनंदन।

तू तो है आनँदघन नँदनंदन।

तू है रक्षक दीनन नँदनंदन।

तू है पतितन पावन नँदनंदन।

तू अधम उधारन नँदनंदन।

तू है भाजे सुनि क्रंदन नँदनंदन।

तू है त्रिभुवन मोहन नँदनंदन।

तू है मदनहुँ मोहन नँदनंदन।

तू है ब्रजमोहन नँदनंदन।

तू है ज्ञानिन मोहन नँदनंदन।

तू है योगिन मोहन नँदनंदन।

ब्रज गोपिन मोहन नँदनंदन।

ब्रज गोपन मोहन नँदनंदन।

ब्रज गायन मोहन नँदनंदन।

Source page 71

ब्रज पक्षिन मोहन नँदनंदन।

ब्रज वृक्षन मोहन नँदनंदन।

ब्रज अग जग मोहन नँदनंदन।

तेरा तन आनंदघन नँदनंदन।

तू है मेरा “कृपालु” पिय नँदनंदन॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २034
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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