कीर्तन 51–100
कीर्तन 70 · Kirtan 70
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
वो बरसाने वारी, मनमोहन मन हारी।
वो बरसाने वारी, मनमोहन मन हारी।
तू दीनन हितकारी, प्यारी प्यारी प्यारी॥
वो मादन रस वारी, हरि कर तव मनुहारी।
आरति कर ब्रजनारी, प्यारी प्यारी प्यारी॥
वो सुखघन तन वारी, प्यारी भोरी भारी।
सुकुमारहुँ सुकुमारी, प्यारी प्यारी प्यारी॥
वो गौर बरनि वारी, तव छवि पर छवि वारी।
तोहिं जान न श्रुति चारी, प्यारी प्यारी प्यारी॥
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वो शीशफूल वारी, तोहि ध्यावत बनवारी।
सेवत नित ब्रजनारी, प्यारी प्यारी प्यारी॥
वो सिर चूनरि वारी, तोपर हरि हर वारी।
सँग लख लख ब्रजनारी, प्यारी प्यारी प्यारी॥
वो नथ बेसर वारी, तव चाकर बनवारी।
स्वागत कर गिरिधारी, प्यारी प्यारी प्यारी॥
वो नीलांबर वारी, तू स्वामिनि बनवारी।
निज मन मोहन वारी, प्यारी प्यारी प्यारी॥
