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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 70 · 78/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 70 · Kirtan 70

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

21 source linesपुस्तक पृष्ठ 175–176PDF 192–193

वो बरसाने वारी, मनमोहन मन हारी।

(हैं बाको सुन्दर...)

वो बरसाने वारी, मनमोहन मन हारी।

तू दीनन हितकारी, प्यारी प्यारी प्यारी॥

वो मादन रस वारी, हरि कर तव मनुहारी।

आरति कर ब्रजनारी, प्यारी प्यारी प्यारी॥

वो सुखघन तन वारी, प्यारी भोरी भारी।

सुकुमारहुँ सुकुमारी, प्यारी प्यारी प्यारी॥

वो गौर बरनि वारी, तव छवि पर छवि वारी।

तोहिं जान न श्रुति चारी, प्यारी प्यारी प्यारी॥

वो चंद्रकला वारी, वारी लखि बनवारी।

कह पुनि पुनि बलिहारी, प्यारी प्यारी प्यारी॥

Source page 176

वो शीशफूल वारी, तोहि ध्यावत बनवारी।

सेवत नित ब्रजनारी, प्यारी प्यारी प्यारी॥

वो सिर चूनरि वारी, तोपर हरि हर वारी।

सँग लख लख ब्रजनारी, प्यारी प्यारी प्यारी॥

वो नथ बेसर वारी, तव चाकर बनवारी।

स्वागत कर गिरिधारी, प्यारी प्यारी प्यारी॥

वो नीलांबर वारी, तू स्वामिनि बनवारी।

निज मन मोहन वारी, प्यारी प्यारी प्यारी॥

वो मृदु मुसकनि वारी, दृग चितवनि बलिहारी।

गति पर गज गति वारी, प्यारी “कृपालु” प्यारी॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २078
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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