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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 97 · 105/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 97 · Kirtan 97

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

42 source linesपुस्तक पृष्ठ 244–246PDF 261–263

चलु चलु चलु तजु अंचल चंचल।

(नथवारी रंगीली...)

चलु चलु चलु तजु अंचल चंचल।

लखु लखु लखु उत लख सखि चंचल।

लखि सखि गिरे तोरे मुख राल चंचल।

तू तो लखि सखि बने जनु रंक चंचल।

तेरे जैसा लंपट जग नहिं चंचल।

तोहिं डर नहिं लोकहुँ कहँ चंचल।

तोहिँ डर नहिं परलोकहुँ चंचल।

तोहिं डर नहिं भगवानहुँ चंचल।

तोहिं डर नहिं नारी गारी को भी चंचल।

तू अरु तेरा प्रेम चंचल चंचल।

छल कपट का तू है सरदार चंचल।

Source page 245

झूठ का तो है तू रूप साकार चंचल।

स्वारथ का तो है अवतार चंचल।

आयो द्वापर ही घोर कलि चंचल।

तू न देखे अनब्याही ब्याही कछु चंचल।

तोहिं नारी कारी कुबरिहुँ भाये चंचल।

जितनोइ छोटो खोटो तितनोइ चंचल।

तू तो जाने जादू टोना चेटक चंचल।

तेरी आँखों में न जाने कैसा जादू चंचल।

जो भी देखे गिरे भू पे कहे हाय चंचल।

तू ने ब्रज महँ अति करि दीनी चंचल।

अति अति बुरी होती तू न जाने चंचल।

काउ दिन या को पावे फल भल चंचल।

तो सोँ हारी सबरी ब्रजनारी चंचल।

एक हैं राधा बरसाने वारी चंचल।

तोहिं सीधा कर देंगी पल महँ चंचल।

नहिं माने तो चला जा अभी हाल चंचल।

तोहिं निज छवि को है बड़ो मद चंचल।

जब देखेगा तू राधा रानी छवि चंचल।

तेरा सारा मद चूर चूर होगा चंचल।

Source page 246

तू ने बहुत सताया सब कहँ चंचल।

अब हम सब लेंगी दाँव तो सों चंचल।

लाली आगे न चले तेरा छल चंचल।

सेर को मिलेगा तब सवा सेर चंचल।

जब तलफेगा हा राधे कहि चंचल।

तब हम सब सखि लखि हँसें चंचल।

तू भी रोयेगा सखिन ढिंग तब चंचल।

हा हा खायेगा परेगा पैयाँ सखि चंचल।

तू कहेगा आली लाली सों मिला दे चंचल।

तब सखिहुँ चखायेंगी मजा चंचल।

यह तबहुँ न सुधरे “कृपालु” चंचल॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २105
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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