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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 107 · 115/142

कीर्तन 101–134

कीर्तन 107 · Kirtan 107

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

52 source linesपुस्तक पृष्ठ 268–270PDF 285–287

निज कर निज गर फाँसी डार।

(नथवारी रंगीली...)

निज कर निज गर फाँसी डार।

मैं समझी थी सुख घन यार।

किन्तु मिला दुख विरह अपार।

गई रही कालिंदी पार।

झूमत आयो नंद कुमार।

टेर्यो मुरलि मधुर रिझवार।

सुनि हौं सुधि बुधि देह बिसार।

लख्यो मुरलिधर घूँघट टार।

देखत ही भये नैना चार।

वाने नैनन सैनन मार।

धँस्यो सैन मम हृदय मझार।

गिरि कहत “हा प्राणाधार, ।

गइ मुर्छा तब देखा यार।

ललित त्रिभंग लखत रह यार।

पुनि कह सखि रह कैसा वार।

आ आ अब तो करि ले प्यार।

Source page 269

लग जा मेरे उर ब्रज नार।

हौं कह जा जा जा बटमार।

हौं नहिं ऐसी वैसी नार।

मम पति इक नारी व्रतधार।

हौं हूँ इक पतिव्रत व्रत धार।

तू है लंपट निपट गमार।

तो सों कौन करेगी प्यार।

ज्यों मधुकर कर सुमनन प्यार।

हौं जानूँ तो कहँ रिझवार।

तू है सगुण ब्रह्म साकार।

कोऊ न पायो तेरो पार।

तोसों विधि हरि हर गये हार।

तू है मायापति रिझवार।

तेरी माया अपरंपार।

नेति नेति कह वेद पुकार।

तू माने प्रेमी सों हार।

प्रेमी तोहिं नचावन हार।

तू प्रेमिन कठपुतली यार।

प्रेमी नट तू मरकट यार।

Source page 270

ब्रज महँ सबै प्रेम अवतार।

तेरी दाल गले नहिं यार।

हम नहिं मान ब्रह्म साकार।

हम माने तोहिं आपुन यार।

गारी दे दारीके यार।

ब्रज नहिं अस्तुति कर कोउ नार।

ब्रज नहिं आरति कोउ उतार।

ब्रज कह कपटिन को सरदार।

ब्रज कह लबरन को सरदार।

ब्रज कह जारन को सरदार।

ब्रज कह ठगहारन सरदार।

ब्रज कह जादूगर सरदार।

ब्रज कह झूठेन को सरदार।

ब्रज कह चोरन को सरदार।

ब्रज कह बट मारन सरदार।

कह “कृपालु” भोरो मम यार॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २115
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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