देखो देखो आली लाली आजु बनी गोरे ग्वाल।
(नथवारी रंगीली...)
देखो देखो आली लाली आजु बनी गोरे ग्वाल।
छलने की सोची वाने छलिया नँदलाल।
सिर बाँधी वैसी पाग जैसी बाँधे नँदलाल।
सिर मोर मुकुट तिरछे जनु लाल।
Source page 329
खोलि दई वेणी लटकारी प्यारी घुँघराल।
केशर को तिलक लगायो निज भाल।
कजरारी अँखियन दिय काजर डाल।
श्रुति कुंडल झलमल झलकत गाल।
नासा बेसर हलकति जनु लाल।
चंचल चितवनि अति सरस रसाल।
मुरि मुरि मृदु मुसकनि मोहीँ ब्रज बाल।
कर कंकन अँगुरिन मुँदरि रसाल।
गर रंग बिरंगी मणिमय माल।
गर सोहति अति वैजंती माल।
गल सोहति पंच पुष्प वनमाल।
गल भल दुकूल पट गुंज माल।
कटि किंकिनि रुन झुन धुन है रसाल।
कटि तट पीतांबर कछनि लाल।
लइ खोँसि काछनिहिं मुरलि रसाल।
पग मणिमय नूपुर धुनि है रसाल।
दोउ कंध लकुटि कामरिहुँ रसाल।
भइ खरि जनु ललित त्रिभंगी लाल।
नख शिख शृंगार किये जनु लाल।
Source page 330
गज मत्त लजावनि चलत चाल।
नँदलाल सरिस सब चाल ढाल।
लखि लखि ललितादिक भईं निहाल।
पुनि पुल्लिँग वाक्यन सीख हाल।
इक सखि बनि गइ पुनि नँदलाल।
संवाद किये पुनि ग्वाल लाल।
अभिनय सीखे इमि गोरे ग्वाल।
सखि कह लग साँचुहिँ गोरे ग्वाल।
अब चलहु लाल ढिंग कह ब्रज बाल।
अब नहिँ पहिचान सकत नँदलाल।
बनि साँवरि छल्यो तोहिँ नँदलाल।
तुमहूँ छलु अब बनि गोरे ग्वाल।
नित छलत फिरत भोरिन ब्रज बाल।
फल पाय छलन को आजु लाल।
बलि बलि “कृपालु” बलि गोरे ग्वाल॥