कीर्तन 1–50
कीर्तन 18 · Kirtan 18
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
कब देखूँ नैनन छवि घनश्याम।
Source page 51
कब सूँघूँ दिव्य तनु गंध श्याम।
कब ध्यावूँ दिव्य मन दिव्य श्याम।
कब देखूँ यशुमति गोद लिये श्याम।
कब देखूँ मैया गोद पिये दूध श्याम।
कब देखूँ बाबा गोद छी छी करें श्याम।
कब देखूँ पग अँगुठा पियें श्याम।
कब देखूँ सोये सोये रोयेँ आपु श्याम।
कब देखूँ सोये सोये हँसेँ आपु श्याम।
कब देखूँ घुटुवन बल चलेँ श्याम।
कब देखूँ चुपके ते माटी खायेँ श्याम।
कब देखूँ चलनो सिखावे माय श्याम।
Source page 52
कब देखूँ बिनु बैन गावें कछु श्याम।
कब देखूँ नंगे पुंगे नाचत श्याम।
कब देखूँ मारे गुलचा सखि श्याम।
कब देखूँ चंदा माँगे लोटत श्याम।
कब देखूँ नंगे पाम गो चारे श्याम।
कब देखूँ मुँह लटकाये रोये श्याम।
कब देखूँ द्वै दाँत किलकनि श्याम।
कब देखूँ सखन जितावें खेल श्याम।
कब देखूँ सखन रुवावें ब्रह्म श्याम।
Source page 53
कब देखूँ संग संग खेलें राम श्याम।
कब देखूँ खेल महँ लरें राम श्याम।
कब देखूँ मैया के पग सिर श्याम।
कब देखूँ नंद की खड़ाऊँ सिर श्याम।
कब देखूँ अँगुठा दिखावें ग्वाल श्याम।
कब देखूँ ऊखल बँधे ब्रह्म श्याम।
कब देखूँ ग्वाल घोड़ा बने भजे श्याम।
कब देखूँ छाछ दै नचावेँ सखि श्याम।
कब देखूँ जोरी दोउ श्यामा श्याम।
कब देखूँ दिव्य रास सेवा कुंज श्याम।
कब देखूँ कुंज कुंज मंजु केलि श्याम।
कब देखूँ श्यामा जू के पग चापेँ श्याम।
Source page 54
कब देखूँ सांवरि सखि बने श्याम।
कब देखूँ श्यामा संग झूला झूलें श्याम।
कब देखूँ सखिन झुलावें श्यामा श्याम।
कब देखूँ यमुना में करें केलि श्याम।
कब देखूँ मंद मंद मुसकात श्याम।
कब देखूँ अति मतवाली चाल श्याम।
कब देखूँ “तू मेरी” जब कह श्याम।
