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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 18 · 26/142

कीर्तन 1–50

कीर्तन 18 · Kirtan 18

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

76 source linesपुस्तक पृष्ठ 50–54PDF 67–71

कब देखूँ नैनन छवि घनश्याम।

(नीको लागे...)

कब देखूँ नैनन छवि घनश्याम।

कब सुनूँ कानन मृदु बैन श्याम।

कब लउँ रस अधरामृत श्याम।

Source page 51

कब करुँ आलिंगन तनु श्याम।

कब सूँघूँ दिव्य तनु गंध श्याम।

कब ध्यावूँ दिव्य मन दिव्य श्याम।

कब चापूँ कर चरनन श्याम।

कब नित्य वास करुँ धाम श्याम।

कब सेवा करुँ अष्टयाम श्याम।

कब देखूँ यशुमति गोद लिये श्याम।

कब देखूँ मैया गोद पिये दूध श्याम।

कब देखूँ बाबा गोद छी छी करें श्याम।

कब देखूँ पग अँगुठा पियें श्याम।

कब देखूँ सोये सोये रोयेँ आपु श्याम।

कब देखूँ सोये सोये हँसेँ आपु श्याम।

कब देखूँ घुटुवन बल चलेँ श्याम।

कब देखूँ चुपके ते माटी खायेँ श्याम।

कब देखूँ चलनो सिखावे माय श्याम।

कब देखूँ लटपटात चलें श्याम।

कब देखूँ चलत चलत गिरेँ श्याम।

कब देखूँ मैया ते रूठेँ जब श्याम।

कब देखूँ मैया मनावे जब श्याम।

Source page 52

कब देखूँ गोद हित झगरत श्याम।

कब देखूँ सोवत राधे कह श्याम।

कब देखूँ बिनु बैन गावें कछु श्याम।

कब देखूँ तुतुरात बोलत श्याम।

कब देखूँ नंगे पुंगे नाचत श्याम।

कब देखूँ धूरि धूसरित श्याम।

कब देखूँ मारे गुलचा सखि श्याम।

कब देखूँ चंदा माँगे लोटत श्याम।

कब देखूँ नंगे पाम गो चारे श्याम।

कब देखूँ मुँह लटकाये रोये श्याम।

कब देखूँ द्वै दाँत किलकनि श्याम।

कब देखूँ बछरन बतरात श्याम।

कब देखूँ चाटत धेनु तनु श्याम।

कब देखूँ बछरन चूमत श्याम।

कब देखूँ सखन जितावें खेल श्याम।

कब देखूँ सखन रुवावें ब्रह्म श्याम।

कब देखूँ सखन चिढ़ावत श्याम।

कब देखूँ ग्वाल कह परो पायो श्याम।

कब देखूँ नंद चले घोड़ा बनि श्याम।

Source page 53

कब देखूँ संग संग खेलें राम श्याम।

कब देखूँ खेल महँ लरें राम श्याम।

कब देखूँ पकरत राम कान श्याम।

कब देखूँ मैया के पग सिर श्याम।

कब देखूँ नंद की खड़ाऊँ सिर श्याम।

कब देखूँ अँगुठा दिखावें ग्वाल श्याम।

कब देखूँ नाचत संग राम श्याम।

कब देखूँ माखन चोरत श्याम।

कब देखूँ चोरी करि भाजत श्याम।

कब देखूँ ऊखल बँधे ब्रह्म श्याम।

कब देखूँ ग्वाल घोड़ा बने भजे श्याम।

कब देखूँ छाछ दै नचावेँ सखि श्याम।

कब देखूँ मुख टीका गोबर श्याम।

कब देखूँ जोरी दोउ श्यामा श्याम।

कब देखूँ दिव्य रास सेवा कुंज श्याम।

कब देखूँ कुंज कुंज मंजु केलि श्याम।

कब देखूँ श्यामा जू के पग चापेँ श्याम।

कब देखूँ श्यामा को मनावत श्याम।

कब देखूँ श्यामा डर काँपत श्याम।

Source page 54

कब देखूँ सांवरि सखि बने श्याम।

कब देखूँ श्यामा संग झूला झूलें श्याम।

कब देखूँ सखिन झुलावें श्यामा श्याम।

कब देखूँ यमुना में करें केलि श्याम।

कब देखूँ सखिन रिझावत श्याम।

कब देखूँ मो ढिंग आवत श्याम।

कब देखूँ मंद मंद मुसकात श्याम।

कब देखूँ चंचल चितवनि श्याम।

कब देखूँ अति मतवाली चाल श्याम।

कब देखूँ ललित त्रिभंगी श्याम।

कब देखूँ “तू मेरी” जब कह श्याम।

कब देखूँ मारे मोहिं नैन बान श्याम।

कब देखूँ उरझाने श्यामा श्याम।

कब देखूँ नटखट नट वेष श्याम।

कब देखूँ हौं “कृपालु” छेड़त श्याम॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २026
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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