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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 92 · 100/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 92 · Kirtan 92

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

38 source linesपुस्तक पृष्ठ 231–233PDF 248–250

ओरे नटखट मोते न लिपट परे हट।

(नथवारी रंगीली...)

ओरे नटखट मोते न लिपट परे हट।

तोहिँ जाने ब्रजवासी तू बड़ोइ लंपट।

चल चल चंचल तज अँचल पट।

मैं न ऐरी गैरी नारी ओ अनारी नटखट।

मैं हूँ जाकी नारी सो है लठधारी नटखट।

अभी हेला दउँ आवे पति ले के लठ झट।

लेइ ठकुराई तोरि निकारि पति झट।

काउ गर लर तोरे काउ फोरे जल घट।

काउ मारे नैनन की कटारी नटखट।

काउ कहे मेरी प्यारी मोहिं पिय कहु झट।

काउ माँगे दधि दान जो न दे तो फोरे घट।

जित चले नटखट उत करे खटपट।

कर छींके नहिं पहुँचे तो बड़ो होय झट।

काउ घर चोरे माखन काउ चोरे पट।

तू ने पी लइ घोरि लोक लाज नटखट।

तू तो है जादूगर सरदार नटखट।

Source page 232

जादू करि प्रकट्यो कारागार नटखट।

जादू करि प्रहरिन को सुलाया नटखट।

जादू करि ताला खुलवाया नटखट।

जादू करि यमुना को सुखाया नटखट।

जादू करि यशुदा को सुलाया नटखट।

जादू करि यशुदा को माँ बनाया नटखट।

जादू करि माँ को मुख में दिखाया जग झट।

जादू करि विधि बुधि भरमाया नटखट।

जादू करि शिव को बनाया गोपी नटखट।

जादू करि सुरपति को रुलाया नटखट।

जादू करि गिरिराज को उठाया नटखट।

जादू करि कामहुँ को हराया नटखट।

जादू करि चोरी चोरी किया रास नटखट।

जादू करि धरे अगनित तनु नटखट।

जादू करि मोहे ब्रज गोपिन नटखट।

जादू करि मोहे ब्रज गोपन नटखट।

जादू करि मोहे भानु कुँवरि नटखट।

जादू करि किये असुरन वध नटखट।

जादू करि मार्यो कौरव नटखट।

Source page 233

जादू करि सशरीर गयो नटखट।

जादू करि मोहे मोहूँ “कृपालु” नटखट॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २100
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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