कीर्तन 51–100
कीर्तन 92 · Kirtan 92
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ओरे नटखट मोते न लिपट परे हट।
तोहिँ जाने ब्रजवासी तू बड़ोइ लंपट।
मैं न ऐरी गैरी नारी ओ अनारी नटखट।
मैं हूँ जाकी नारी सो है लठधारी नटखट।
अभी हेला दउँ आवे पति ले के लठ झट।
लेइ ठकुराई तोरि निकारि पति झट।
काउ गर लर तोरे काउ फोरे जल घट।
काउ कहे मेरी प्यारी मोहिं पिय कहु झट।
काउ माँगे दधि दान जो न दे तो फोरे घट।
कर छींके नहिं पहुँचे तो बड़ो होय झट।
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जादू करि प्रकट्यो कारागार नटखट।
जादू करि प्रहरिन को सुलाया नटखट।
जादू करि यमुना को सुखाया नटखट।
जादू करि यशुदा को सुलाया नटखट।
जादू करि यशुदा को माँ बनाया नटखट।
जादू करि माँ को मुख में दिखाया जग झट।
जादू करि विधि बुधि भरमाया नटखट।
जादू करि शिव को बनाया गोपी नटखट।
जादू करि सुरपति को रुलाया नटखट।
जादू करि गिरिराज को उठाया नटखट।
जादू करि कामहुँ को हराया नटखट।
जादू करि चोरी चोरी किया रास नटखट।
जादू करि मोहे ब्रज गोपिन नटखट।
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