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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 110 · 118/142

कीर्तन 101–134

कीर्तन 110 · Kirtan 110

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

46 source linesपुस्तक पृष्ठ 275–277PDF 292–294

भाय गयो भाय गयो भाय गयो बलभाय।

(नथवारी रंगीली...)

भाय गयो भाय गयो भाय गयो बलभाय।

अब जग सुख नहिं मोहिं नेकु सुहाय।

गइ पनघट सँग सखियन समुदाय।

आयो घूमत झूमत तहँ बलभाय।

वाने कही वोरी गोरी टुक सुनु इत आय।

हौँ बोली बोल बोल मोय काहे को बुलाय।

वाने कही बात कान में कहन की आय।

यह सुनि मैं भी गइ वाय ढिंग बलभाय।

वाने कही चलु सँग तेरी माय ने बुलाय।

मैंने कही बता मोहिं काहे माय ने बुलाय।

वाने कही धीरे मुख मम कान में लगाय।

Source page 276

आजु अभी अभी मेरे घर आई तेरी माय।

पुनि उर ते लगा के भेंटी तेरी मेरी माय।

पुनि खुसुर खुसुर दोउ लागी बतराय।

करूँ आजु ही सगाई इमि कह दोउ माय।

पुनि हँसि तेरी माय ते बोली मेरी माय।

निज लाली को बुला दे देखूँ मैं भी छवि वाय।

जा बुला ला लाला लाली मोते कही तेरी माय।

मैं तो चाहता ही था कि तू भी मेरी बनि जाय।

कहा तू भी मोहिं चाहती थी साँचु बताय।

मैं बोली नहिं कछु चली सँग बलभाय।

मोहिँ मग में अकेली लखि सोइ बलभाय।

गलबाँही दे के लिय मोहिं उर ते लगाय।

वह सुख सखि मुख ते नहिं कहि जाय।

मैंने सोची अब तो बने पिय बलभाय।

याते मैंने भी लगाया उर वाय बलभाय।

मैं भूली सुधि रंकिनि पारस पाय।

पुनि बार बार दोउ दोउ उर ते लगाय।

कभू बैठूँ कभू चलूँ कभू उर ते लगाय।

तनु काँपे दृग आनँद जल बरसाय।

Source page 277

तनु निकसे पसीना रोम रोम हरषाय।

मिल्यो एतिक सुख सखि उर न समाय।

कैसेहुँ गई धीरे धीरे सँग बलभाय।

जब आयो घर पास तब बोल्यो बलभाय।

तू तो चलु अलि आगे तोहिं देखे मेरी माय।

मैं भी आवूँ अभी उत मोहिं सखन बुलाय।

मैं जो गई घर देखा तहँ नहिं वाय माय।

मैंने पूछा यशुमति इत आई कहा माय।

नहिँ नहिँ इत कोउ नहिँ आई कह माय।

काहे पूछे कहा बात है बता दे कह माय।

मैंने बात बताई जो जो करी बलभाय।

माय बोली वो तो झूठा वाय काहे पतियाय।

अब कहाँ जावूँ कहाँ पावूँ पुनि बलभाय।

रोम रोम रस भरि दिय पिय बलभाय।

तेरो हाल लखि हौं “कृपालु” बलि बलि जाय॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २118
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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