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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 30 · 38/142

कीर्तन 1–50

कीर्तन 30 · Kirtan 30

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

72 source linesपुस्तक पृष्ठ 78–82PDF 95–99

बलिहारी बलिहारी वारी बनवारी।

(नीको लागे...)

बलिहारी बलिहारी वारी बनवारी।

तन मन प्राण हौं वारी बनवारी।

Source page 79

दिव्य नीलमणि जनु तनु बनवारी।

दिव्य तनु दिव्य सुगंध बनवारी।

दिव्य देह दुति प्यारी बनवारी।

सिर दिव्य कनक मुकुट बनवारी।

दिव्य मुकुट दिव्य मणि बनवारी।

सिर दिव्य मोर मुकुट बनवारी।

दिव्य तिलक मृग मद बनवारी।

श्रुति दिव्य कुण्डल भल बनवारी।

नैनन दिव्य प्रेम बनवारी।

दिव्य रस दृग चितवनि बनवारी।

बेसर दिव्य चमक बनवारी।

मुसुकनि दिव्य सरस बनवारी।

कंकन दिव्य कनक बनवारी।

गल पटपीत दिव्य बनवारी।

गल मणिमाल दिव्य बनवारी।

गल बनमाल दिव्य बनवारी।

गल मुक्तमाल दिव्य बनवारी।

गल गुंजमाल दिव्य बनवारी।

गल कौस्तुभ मणि दिव्य बनवारी।

Source page 80

बस जलजा उर बिच बनवारी।

दिव्य काछनी कटि बनवारी।

कटि किंकिनिहुँ दिव्य बनवारी।

कटि पट पीत दिव्य बनवारी।

नूपुर चरण दिव्य बनवारी।

पद नख मणि दुति दिव्य बनवारी।

अति मतवारी गति बनवारी।

ललित त्रिभंगी तनु बनवारी।

रोम रोम चुये रस बनवारी।

लाजति छवि लखि छवि बनवारी।

निज मन मोहिनि छवि बनवारी।

मदन विमोहिनि छवि बनवारी।

विधि हरि हर मोहन बनवारी।

गोपिन मन मोहन बनवारी।

गोपन मन मोहन बनवारी।

जनक सनक मोहन बनवारी।

नारद शुक मोहन बनवारी।

बनवारी सम छवि बनवारी।

पतितन अपनावत बनवारी।

Source page 81

दीनबन्धु दीनानाथ बनवारी।

शरणागत वत्सल बनवारी।

भक्तन पराधीन बनवारी।

भक्त सम नहिं कोउ प्रिय बनवारी।

भक्त सम कमला न प्रिय बनवारी।

भक्त सम शिव नहिं प्रिय बनवारी।

भक्त सम ब्रह्मा न प्रिय बनवारी।

भक्त सम आत्मा न प्रिय बनवारी।

भक्त भक्त ही भक्त कह बनवारी।

भक्त पतन न हो कह बनवारी।

भक्तन के भक्त हैं बनवारी।

भक्तों के पाछे पाछे चलें बनवारी।

भक्त पद रज आंजेँ बनवारी।

भक्त भक्ति बिनु भक्ति दे न बनवारी।

भक्त का ऋणी आपु माने बनवारी।

जीवों के जीवन बनवारी।

जीव अरु माया पति बनवारी।

विधि हरि हर ध्यावें बनवारी।

पूर्ण ब्रह्म पुरुषोत्तम बनवारी।

Source page 82

ब्रह्म की प्रतिष्ठा भी हैं बनवारी।

सर्व कारण कारण बनवारी।

साकार हो के भी विभु बनवारी।

सब उर पुर नित बस बनवारी।

अग जग जग स्रष्टा बनवारी।

अग जग जग रक्षक बनवारी।

अग जग प्रलय करत बनवारी।

अग जग जग व्यापक बनवारी।

अद्वय ज्ञान तत्व बनवारी।

परतत्व अवतारी बनवारी।

वृंदारक वृंद वंद्य बनवारी।

दे दो “कृपालु” प्रेम शुद्ध बनवारी॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २038
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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