बलिहारी बलिहारी वारी बनवारी।
(नीको लागे...)
बलिहारी बलिहारी वारी बनवारी।
तन मन प्राण हौं वारी बनवारी।
Source page 79
दिव्य नीलमणि जनु तनु बनवारी।
दिव्य तनु दिव्य सुगंध बनवारी।
दिव्य देह दुति प्यारी बनवारी।
सिर दिव्य कनक मुकुट बनवारी।
दिव्य मुकुट दिव्य मणि बनवारी।
सिर दिव्य मोर मुकुट बनवारी।
दिव्य तिलक मृग मद बनवारी।
श्रुति दिव्य कुण्डल भल बनवारी।
नैनन दिव्य प्रेम बनवारी।
दिव्य रस दृग चितवनि बनवारी।
बेसर दिव्य चमक बनवारी।
मुसुकनि दिव्य सरस बनवारी।
कंकन दिव्य कनक बनवारी।
गल पटपीत दिव्य बनवारी।
गल मणिमाल दिव्य बनवारी।
गल बनमाल दिव्य बनवारी।
गल मुक्तमाल दिव्य बनवारी।
गल गुंजमाल दिव्य बनवारी।
गल कौस्तुभ मणि दिव्य बनवारी।
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बस जलजा उर बिच बनवारी।
दिव्य काछनी कटि बनवारी।
कटि किंकिनिहुँ दिव्य बनवारी।
कटि पट पीत दिव्य बनवारी।
नूपुर चरण दिव्य बनवारी।
पद नख मणि दुति दिव्य बनवारी।
अति मतवारी गति बनवारी।
ललित त्रिभंगी तनु बनवारी।
रोम रोम चुये रस बनवारी।
लाजति छवि लखि छवि बनवारी।
निज मन मोहिनि छवि बनवारी।
मदन विमोहिनि छवि बनवारी।
विधि हरि हर मोहन बनवारी।
गोपिन मन मोहन बनवारी।
गोपन मन मोहन बनवारी।
जनक सनक मोहन बनवारी।
नारद शुक मोहन बनवारी।
बनवारी सम छवि बनवारी।
पतितन अपनावत बनवारी।
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दीनबन्धु दीनानाथ बनवारी।
शरणागत वत्सल बनवारी।
भक्तन पराधीन बनवारी।
भक्त सम नहिं कोउ प्रिय बनवारी।
भक्त सम कमला न प्रिय बनवारी।
भक्त सम शिव नहिं प्रिय बनवारी।
भक्त सम ब्रह्मा न प्रिय बनवारी।
भक्त सम आत्मा न प्रिय बनवारी।
भक्त भक्त ही भक्त कह बनवारी।
भक्त पतन न हो कह बनवारी।
भक्तन के भक्त हैं बनवारी।
भक्तों के पाछे पाछे चलें बनवारी।
भक्त पद रज आंजेँ बनवारी।
भक्त भक्ति बिनु भक्ति दे न बनवारी।
भक्त का ऋणी आपु माने बनवारी।
जीवों के जीवन बनवारी।
जीव अरु माया पति बनवारी।
विधि हरि हर ध्यावें बनवारी।
पूर्ण ब्रह्म पुरुषोत्तम बनवारी।
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ब्रह्म की प्रतिष्ठा भी हैं बनवारी।
सर्व कारण कारण बनवारी।
साकार हो के भी विभु बनवारी।
सब उर पुर नित बस बनवारी।
अग जग जग स्रष्टा बनवारी।
अग जग जग रक्षक बनवारी।
अग जग प्रलय करत बनवारी।
अग जग जग व्यापक बनवारी।
अद्वय ज्ञान तत्व बनवारी।
परतत्व अवतारी बनवारी।
वृंदारक वृंद वंद्य बनवारी।
दे दो “कृपालु” प्रेम शुद्ध बनवारी॥