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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 22 · 30/142

कीर्तन 1–50

कीर्तन 22 · Kirtan 22

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

21 source linesपुस्तक पृष्ठ 60–61PDF 77–78

तुम ही मम नंदकुमार, तुम स्वामि सखा सुत यार।

(हैं बाँको सुन्दर...)

तुम ही मम नंदकुमार, तुम स्वामि सखा सुत यार।

तुम ही पतितन रखवार, हौं शरण शरण सरकार॥

तुम मम गति नंदकुमार, तुम ही मम मति रिझवार।

तुम ही अवलंब हमार, हौं शरण शरण सरकार॥

तुम ही हो मम भरतार, तुम ही हो हितू हमार।

तुम ही हो प्राणाधार, हौं शरण शरण सरकार॥

तुम प्रेरक नंदकुमार, तुम मम रक्षक रिझवार।

तुम ही सर्वस्व हमार, हौं शरण शरण सरकार॥

Source page 61

तुम ही पितु नंदकुमार, तुम ही माता रिझवार।

तुम सों सब नात हमार, हौं शरण शरण सरकार॥

तुम ही दीनन रखवार, तुम ही पतितन पतवार।

तुम अधम उधारन हार, हौं शरण शरण सरकार॥

तुम ही स्रष्टा संसार, तुम ही पालक भरतार।

तुम ही कर लय करतार, हौं शरण शरण सरकार॥

तुम शरणागत रखवार, तुम करुणा को भंडार।

तुम जन रंजन रिझवार, हौं शरण शरण सरकार॥

तुम भक्त वश्य रिझवार, तुम को प्रिय है प्रिय प्यार।

तुम नाचत प्रिय करतार, हौं शरण शरण सरकार॥

तुम सम तुम नंदकुमार, तुम पर कामहुँ बलिहार।

तुम सों विधि हरि हर हार, हौं शरण “कृपालु” तिहार॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २030
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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