कीर्तन 1–50
कीर्तन 22 · Kirtan 22
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
तुम ही मम नंदकुमार, तुम स्वामि सखा सुत यार।
तुम ही मम नंदकुमार, तुम स्वामि सखा सुत यार।
तुम ही पतितन रखवार, हौं शरण शरण सरकार॥
तुम मम गति नंदकुमार, तुम ही मम मति रिझवार।
तुम ही अवलंब हमार, हौं शरण शरण सरकार॥
तुम ही हो मम भरतार, तुम ही हो हितू हमार।
तुम ही हो प्राणाधार, हौं शरण शरण सरकार॥
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तुम ही पितु नंदकुमार, तुम ही माता रिझवार।
तुम सों सब नात हमार, हौं शरण शरण सरकार॥
तुम ही दीनन रखवार, तुम ही पतितन पतवार।
तुम अधम उधारन हार, हौं शरण शरण सरकार॥
तुम ही स्रष्टा संसार, तुम ही पालक भरतार।
तुम ही कर लय करतार, हौं शरण शरण सरकार॥
तुम शरणागत रखवार, तुम करुणा को भंडार।
तुम जन रंजन रिझवार, हौं शरण शरण सरकार॥
तुम भक्त वश्य रिझवार, तुम को प्रिय है प्रिय प्यार।
तुम नाचत प्रिय करतार, हौं शरण शरण सरकार॥
