कीर्तन 1–50
कीर्तन 41 · Kirtan 41
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
अलबेली मम सरकार, जो महाभाव साकार।
अलबेली मम सरकार, जो महाभाव साकार।
जेहि सेवत नंदकुमार, जेहि महिमा अपरंपार॥
तनु दिव्य गौर सरकार, बह रोम रोम रस धार।
रस पियत सबै ब्रजनार, जेहि छवि लखि छवि बलिहार॥
जो ब्रह्म रूप साकार, जो प्रेम सुधा रस सार।
धरि कोटिन तनु रिझवार, नहिं पायो जाको पार॥
बरसाने लिए अवतार, सँग कोटि कोटि ब्रजनार।
बनि मनिहारिनि लिलिहार, रिझवत नित नंदकुमार॥
वृंदावन कुंज मझार, बिहरति सँग नंदकुमार।
लखि लखि रस युगल बिहार, सखि कह पुनि पुनि बलिहार॥
जो दीन जनन रखवार, पतितन की सुनत पुकार।
जो मादन रस उर धार, तेहि वश रह नंदकुमार॥
जेहि अस्तुति कर श्रुति चार, विधि हरि हर कर जयकार।
स्वागत कर नंदकुमार, आरति कर सब ब्रजनार॥
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चह महल टहल रिझवार, नहिं पावत नंदकुमार।
तब साँवरि सखि तनु धार, सेवा कर महल मझार॥
