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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 41 · 49/142

कीर्तन 1–50

कीर्तन 41 · Kirtan 41

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

21 source linesपुस्तक पृष्ठ 111–112PDF 128–129

अलबेली मम सरकार, जो महाभाव साकार।

(हैं बाँको सुन्दर...)

अलबेली मम सरकार, जो महाभाव साकार।

जेहि सेवत नंदकुमार, जेहि महिमा अपरंपार॥

तनु दिव्य गौर सरकार, बह रोम रोम रस धार।

रस पियत सबै ब्रजनार, जेहि छवि लखि छवि बलिहार॥

जो ब्रह्म रूप साकार, जो प्रेम सुधा रस सार।

धरि कोटिन तनु रिझवार, नहिं पायो जाको पार॥

बरसाने लिए अवतार, सँग कोटि कोटि ब्रजनार।

बनि मनिहारिनि लिलिहार, रिझवत नित नंदकुमार॥

वृंदावन कुंज मझार, बिहरति सँग नंदकुमार।

लखि लखि रस युगल बिहार, सखि कह पुनि पुनि बलिहार॥

जो दीन जनन रखवार, पतितन की सुनत पुकार।

जो मादन रस उर धार, तेहि वश रह नंदकुमार॥

जेहि अस्तुति कर श्रुति चार, विधि हरि हर कर जयकार।

स्वागत कर नंदकुमार, आरति कर सब ब्रजनार॥

मानिनि डर डर रिझवार, काँपत तनु नंदकुमार।

नैनन बह अँसुवन धार, सिर पग धरि कर मनुहार॥

Source page 112

चह महल टहल रिझवार, नहिं पावत नंदकुमार।

तब साँवरि सखि तनु धार, सेवा कर महल मझार॥

सब जग भज नंदकुमार, सोइ भज स्वामिनि सुकुमार।

पग चापत जेहि रिझवार, सोइ मम “कृपालु” सरकार॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २049
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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