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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 55 · 63/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 55 · Kirtan 55

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

21 source linesपुस्तक पृष्ठ 142–143PDF 159–160

भज मन राधा राधा, रस प्रेम सुधा राधा।

(हैं बाँको सुन्दर...)

भज मन राधा राधा, रस प्रेम सुधा राधा।

ब्रजरस वारिधि राधा, सोइ मम स्वामिनि राधा॥

भज सुर नर मुनि राधा, भज विधि हरि हर राधा।

भज ब्रह्म श्याम राधा, सोइ मम स्वामिनि राधा॥

हैं महाभाव राधा, ह्लादिनी शक्ति राधा।

Source page 143

हैं ब्रह्म रूप राधा, सोइ मम स्वामिनि राधा॥

हैं रसिकन धन राधा, हैं जीवन धन राधा।

हैं मोहन धन राधा, सोइ मम स्वामिनि राधा॥

हैं कृपामयी राधा, हैं प्रेममयी राधा।

हैं श्याममयी राधा, सोइ मम स्वामिनि राधा॥

गति गजगामिनि राधा, छवि अभिरामिनि राधा।

तनु दुति दामिनि राधा, सोइ मम स्वामिनि राधा॥

गाइय गुन गन राधा, ध्याइय नित छवि राधा।

सुमिरिय लीला राधा, सोइ मम स्वामिनि राधा॥

पिय चापत पग राधा, पिय रिझवत नित राधा।

पिय रोम रोम राधा, सोइ मम स्वामिनि राधा॥

चितघन सुखघन राधा, आनँदघन तन राधा।

चंपक वरनी राधा, सोइ मम स्वामिनि राधा॥

जो भज राधा राधा, तेहि अपनावति राधा।

दें प्रेम सुधा राधा, सोइ मम “कृपालु” राधा॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २063
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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