कीर्तन 51–100
कीर्तन 55 · Kirtan 55
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भज मन राधा राधा, रस प्रेम सुधा राधा।
भज मन राधा राधा, रस प्रेम सुधा राधा।
ब्रजरस वारिधि राधा, सोइ मम स्वामिनि राधा॥
भज सुर नर मुनि राधा, भज विधि हरि हर राधा।
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हैं ब्रह्म रूप राधा, सोइ मम स्वामिनि राधा॥
हैं रसिकन धन राधा, हैं जीवन धन राधा।
हैं मोहन धन राधा, सोइ मम स्वामिनि राधा॥
हैं कृपामयी राधा, हैं प्रेममयी राधा।
हैं श्याममयी राधा, सोइ मम स्वामिनि राधा॥
गति गजगामिनि राधा, छवि अभिरामिनि राधा।
तनु दुति दामिनि राधा, सोइ मम स्वामिनि राधा॥
गाइय गुन गन राधा, ध्याइय नित छवि राधा।
सुमिरिय लीला राधा, सोइ मम स्वामिनि राधा॥
पिय चापत पग राधा, पिय रिझवत नित राधा।
पिय रोम रोम राधा, सोइ मम स्वामिनि राधा॥
चितघन सुखघन राधा, आनँदघन तन राधा।
चंपक वरनी राधा, सोइ मम स्वामिनि राधा॥
