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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 91 · 99/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 91 · Kirtan 91

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

45 source linesपुस्तक पृष्ठ 228–230PDF 245–247

ओरी मोरी सखि लूट्यो मोहिं भल बलभाय।

(नथवारी रंगीली...)

ओरी मोरी सखि लूट्यो मोहिं भल बलभाय।

कालि आधी रात आयो मेरे द्वार बलभाय।

आके मेरे द्वार बार बार कुंडी खटकाय।

मैंने पूछी आधी रात कौन कुंडी खटकाय।

वाने कही मैं हूँ मैं हूँ मैं हूँ मैं हूँ बलभाय।

मैंने कही कहा रैन हूँ न नींद तोय आय।

अच्छा अच्छा बता वेगि अब काहे इत आय।

Source page 229

तेरे मायके का आया कोई बोला बलभाय।

वाने तेरी कुंडी खटकाई बार बार जाय।

तेरी नींद ते तो कुंभकर्ण नींदहूँ लजाय।

तू न जागी तब हारि वह मेरे द्वार आय।

आके मेरे द्वार पुनि पुनि कुंडी खटकाय।

मैंने खोलि के किवार पूछा कौन तू बताय।

तब वाने निज परिचय दिया बतलाय।

मैंने कहा आओ बैठो यह तेरो घर आय।

अभी अभी जाके लावूँ वो तो मेरी भाभी आय।

सखि चलु मेरे सँग दउँ भाय मिलवाय।

मैंने सोची साँची आयो होगो मेरो बड़ भाय।

मैं भी चली द्रुत वाके सँग मिले मेरो भाय।

वाने प्रथमहिं दिये कुंज सखन बिठाय।

मैं तो जा रही थी निधरक सँग बलभाय।

इतने में बोले नासिका से सखा समुदाय।

तुम दोनों को ही खावूँ अभी अभी उत आय।

मैं तो डरि गई गइ उर लगि बलभाय।

मैंने कही भूत भूत ले बचाय बलभाय।

वाने कही जनि डरु लिये उर ते लगाय।

Source page 230

पुनि मेरी प्यारी कहि बार बार चिपटाय।

पुनि कही भूतों टुक मेरे सामने तो आय।

एक एक भूत को दूँ यमलोक पठाय।

पुनि पुनि वाने पुनि मोय उर ते लगाय।

वह सुख सखि मुख ते न कहि सक जाय।

मेरो मन कह तू भी वाय उर ते लगाय।

मेरे रोम रोम बसि गयो सोइ बलभाय।

तन मन प्रान सब लियो लूटि बलभाय।

तनु काँपे दृग आनँद जल बरसाय।

जैसे तैसे पहुँचे हम घर बलभाय।

तब द्रुत घर घुसि गयो सो बलभाय।

पुनि कह जा जा घर इत कोउ नहिं आय।

मैंने कही इकली कैसे जावूँ बलभाय।

कर जोरि कहूँ चलु सँग घर पहुँचाय।

न तु मिले सोइ भूत खाय मोहिँ बलभाय।

पुनि आयो दियो गल बहिँयन बलभाय।

मग में जो पायो रस तोहिं कैसे बतलाय।

जानी जानी मैं “कृपालु” भयो पिय बलभाय॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २099
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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