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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 36 · 44/142

कीर्तन 1–50

कीर्तन 36 · Kirtan 36

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

21 source linesपुस्तक पृष्ठ 98–99PDF 115–116

मम स्वामी प्राणाधार, मम सखा श्याम सरकार।

(हैं बाँको सुन्दर...)

मम स्वामी प्राणाधार, मम सखा श्याम सरकार।

मम सुत ब्रज राज दुलार, मम पिय सोइ नंदकुमार॥

जो मोर मुकुट सिर धार, जेहि लटकारी घुँघुरार।

जेहि मृग मद तिलक लिलार, मम पिय सोइ नंदकुमार॥

जो कानन कुंडल धार, जेहि नैनन अति रतनार।

जेहि चितवनि जादू डार, मम पिय सोइ नंदकुमार॥

जो नासा बेसर धार, जेहि मुख मुरली रिझवार।

जेहि मृदु मुसकनि बलिहार, मम पिय सोइ नंदकुमार॥

जो उर पीताम्बर धार, जेहि गर मणि मुक्तन हार।

जेहि गर बनमाला निहार, मम पिय सोइ नंदकुमार॥

जो दोउ कर कंकण धार, जेहि कटि किंकिणि छविदार।

जेहि काछनि कटि रिझवार, मम पिय सोइ नंदकुमार॥

जो कटि पीताम्बर धार, जेहि पग नूपुर झनकार।

जेहि चरण कमल बलिहार, मम पिय सोइ नंदकुमार॥

जो राधा प्राणाधार, जेहि तन सुख घन साकार।

जेहि छवि लखि छवि बलिहार, मम पिय सोइ नंदकुमार॥

Source page 99

जो सखिन प्राण साकार, जेहि अंश सबै अवतार।

जेहि तनु बह ब्रज रस धार, मम पिय सोइ नंदकुमार॥

जो दीनन को रखवार, जेहि पायो नहिँ कोउ पार।

जेहि विधि हरि हर गये हार, मम सोइ “कृपालु” सरकार॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २044
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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