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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 115 · 123/142

कीर्तन 101–134

कीर्तन 115 · Kirtan 115

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

39 source linesपुस्तक पृष्ठ 288–290PDF 305–307

मैं तो लुटि गइ लुटि गइ लुटि गइ यार।

(नथवारी रंगीली...)

मैं तो लुटि गइ लुटि गइ लुटि गइ यार।

वाने सब कछु लूटा नहिं छोड़ा कछु यार।

मैं तो गइ घट भरन यमुन तट यार।

तहँ झट आयो नटखट पनघट यार।

मैंने घट भरा सिर धरा चली घर यार।

वाने मेरे घट झट मार्यो कांकरि यार।

मैंने देखा पाछे कोउ नहिं दीखा मोय यार।

वाने जाने कैसी मुरलि बजाई छुपि यार।

मैं तो मरि गइ धुनि सुनि मुरली की यार।

पुनि आयो कहा कौन फोरा घट तोरा यार।

मैंने कही इत तेरे सिवा छोरा कौन यार।

मैंने देखा निज घुँघटा उठा के वाय यार।

मोरा तन मन प्रान सब लुट गया यार।

तनु सुधि भूली गिरी छिति मुर्छित यार।

आई तहँ कछु सखि देखी गिरी मोहिं यार।

मोकूँ लूट के लुटेरा गया छुपि कहुँ यार।

Source page 289

जब भई चेतना तो उठि देखा चहुँ यार।

सब सखि पूछे हुआ क्या बता दे मोय यार।

भला कैसे मैं बताऊँ वाय जार प्यार यार।

मैंने कही आया औचक चक्कर यार।

सखि कह यह और ही है चक्कर यार।

साँची साँची कहु मैं तो तेरी साँची सखि यार।

मैंने कही पिया किया नैन बान वार यार।

सखि बोली वाने तोरा घट फोरा होगा यार।

ले ले मेरा घट जा झट निज घर यार।

तेरी सासु बड़ी तेज मारे बेलन यार।

जइयो घूँघट में सिर नीचे करि अब यार।

मैं भी पुनि घट भरि चलि निज घर यार।

आयो पुनि सोइ डगर लुटेरा मेरा यार।

वाने कही तू तो अब मोरी ह्वै गइ यार।

अब घुँघटा हटा के लखु इकटक यार।

मन कह लखु बुधि कह चलु घर यार।

मैंने मानी बुधि की गइ निज घर यार।

अब जित देखूँ तित दीखे यार यार।

कभु तन काँपे कभू बह दृग जल यार।

Source page 290

बिनु देखे कल नहिं इक पल कहँ यार।

न बताते बने ना तो छुपाते बने यार।

जो होनी थी “कृपालु” सो तो ह्वै गइ यार॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २123
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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