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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 82 · 90/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 82 · Kirtan 82

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

21 source linesपुस्तक पृष्ठ 204–205PDF 221–222

मेरे नँदनंदन मेरे यशुदा सुवन।

(नीको लागे...)

मेरे नँदनंदन मेरे यशुदा सुवन।

मेेरे यदु नंदन मेरे जीवन धन।

मेरे सत चित घन मेरे आनँद घन।

मेरे सुखघन तन मेरे मन मोहन।

मेरे ब्रज मोहन मेरे मधुसूदन।

Source page 205

मेरे जग वंदन मेरे प्रानन धन।

जीवन जीवन ब्रज गोपिन धन।

ब्रज गोपन धन ब्रज गायन धन।

ब्रज पक्षिन धन ब्रज वृक्षन धन।

ब्रजवासिन धन ब्रज रसिकन धन।

मदन विमोहन त्रिभुवन मोहन।

हरि हर मोहन उमा रमा मोहन।

विश्व विमोहन मोहिनि मोहन।

जन मन मोहन विधि बुधि मोहन।

राजिव लोचन निज मन मोहन।

श्री राधा रमन श्री कमला रमन।

नील जलद तन अधम उधारन।

पतितन पावन जन मन रंजन।

भव भय भंजन कलि मल भंजन।

मेरो “कृपालु” इक तू ही शरन॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २090
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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