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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 118 · 126/142

कीर्तन 101–134

कीर्तन 118 · Kirtan 118

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

45 source linesपुस्तक पृष्ठ 295–297PDF 312–314

मैंने जब ते लखी है सखी दृग बलभाय।

(नथवारी रंगीली...)

मैंने जब ते लखी है सखी दृग बलभाय।

जग फीको लागे नीको लागे सोइ बलभाय।

जित देखूँ तित दीखे सोइ दृग बलभाय।

हिय उठति हूक पुनि पुनि कहि हाय।

हौं इकपल कहँ कहुँ कल नहिँ पाय।

तनु रोम रोम विरहाग जराय।

Source page 296

मेरी नींदिहुँ लै गयो सँग बलभाय।

सारा जग सखि मो कहँ शून्य लखाय।

दृग निशि दिन अँसुवन धार बहाय।

कभू निकले पसीना कभू कँपकँपी आय।

नहिं बनत बताय नहिं बनत छुपाय।

सखि तू ही बताय कछु याय उपाय।

मैंने बैठे ठाले लिय यह रोग लगाय।

मैंने लोगों से सुना है लागी बुरी है बलाय।

तू ने कहा था न लखियो दृग बलभाय।

चली घुँघटा में मैंने दोउ दृगन छुपाय।

मन नहिं माना कहा लखु दृग बलभाय।

कोई काला नाग तो नहीं है दृग बलभाय।

बुधि ने भी हाँ कही तो लखा घुँघटा उठाय।

लखतहिं वाने जाने कैसा जादू सा चलाय।

मैं तो लखतहिं रहि गई दृग बलभाय।

पुनि बार बार वार किये सैन बलभाय।

गिरी मुर्छित छिति कहि हाय बलभाय।

मोहिं मुर्छित लखि कहूँ गयो बलभाय।

जब गइ मुर्छा तो लखा न था बलभाय।

Source page 297

इन्द्रिय मन बुधि डूबे दृग बलभाय।

अब कहा करुँ कहाँ जावूँ विरह सताय।

सोउ बोल्यो नहिं मोय हौं हूँ बोली नहिं वाय।

अब कैसी करूँ कहाँ ढूँढूं वाय बलभाय।

मोय बड़ो रूप मद हतो तोर्यो बलभाय।

मेरा प्रान ले के ही रहेगा दृग बलभाय।

थे रसीले थे गँसीले थे नुकीले दृग वाय।

मोते सहा भी न जाय काऊ कहा भी न जाय।

गति साँप छछूँदरि सी भई हाय।

सखि कह वाने मोहूँ यह रोग लगाय।

चलो राधा रानी ढिंग हाल सुनाय।

वे हैं स्वामिनि उनते न चहिय छुपाय।

दोउ गईं राधा रानी ढिंंग हाल सुनाय।

कहा तुम ही बताओ प्यारी कैसे रोग जाय।

बोली राधा रानी सखि याय राखु छुपाय।

यह रोग कोटि मुक्त महँ कोउ इक पाय।

तो पै कृपा भई पिय दिय रोग लगाय।

यह प्रेम रोग ऐसो मर कर भी न जाय।

बिनु हेतु कृपालु “कृपालु” बलभाय।

ब्रज रस माधुरी · भाग २126
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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