कीर्तन 1–50
कीर्तन 25 · Kirtan 25
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
तू ही तू ही तू ही तो है मेरा नँदनंदन,
मैं भी मैं भी मैं भी तो हूँ तेरा नँदनंदन।
तू ही मेरा तू ही मेरा स्वामी नँदनंदन,
Source page 66
तू ही मेरा तू ही मेरा पिय नँदनंदन।
तू ही मेरी गति मति रति नँदनंदन,
तेरे सिवा मेरा कोई नहिँ नँदनंदन।
तू ही मम माता पिता भ्राता नँदनंदन,
तेरा ही कहा हुआ है यह नँदनंदन।
मेरा सब कुछ ही है तेरा नँदनंदन,
तेरा सब कुछ भी है मेरा नँदनंदन।
माना मैं हूँ अति ही पतित नँदनंदन,
याही ते मैं आया द्वार तेरे नँदनंदन।
माना मैं हूँ अति दीन हीन नँदनंदन,
तू भी तो है दीनानाथ मम नँदनंदन।
माना नाना योनि में मैं घूमा नँदनंदन,
तू भी मेरे साथ-साथ घूमा नँदनंदन।
Source page 67
माना मैंने तुझको भुलाया नँदनंदन,
यामें तो है दोषी तेरी माया नँदनंदन।
तेरा मैं बनूँ ना बनूँ, मेरे नँदनंदन,
तू तो मेरा बन प्राणधन नँदनंदन।
माना मैंने जाना नहिं तोहिँ नँदनंदन,
तेरी कृपा बिनु जाना कौन नँदनंदन।
माना मैंने माया को न जीता नँदनंदन,
तेरी कृपा बिनु कौन जीता नँदनंदन।
माना मैंने भक्ति किया नहिं नँदनंदन,
तू तो बिनु हेतु सनेही नँदनंदन।
माना मैंने किया मनमाना नँदनंदन,
मन ते तो हारे ज्ञानी ध्यानी नँदनंदन।
माना मैंने किया सदा पाप नँदनंदन,
मेरे पाछे माया क्यों लगाया नँदनंदन।
माना मोह निशा में मैं सोया नँदनंदन,
तू तो उर था न क्यों जगाया नँदनंदन।
माना मैं हूँ बुरे से भी बुरा नँदनंदन,
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माना मेरा मन है कुटिल नँदनंदन,
तू तो बिनु सेवा के ही द्रवै नँदनंदन,
प्रणत ही पावे कृपा काहे नँदनंदन।
माना मैंने जग को ही भजा नँदनंदन,
तू भी तो है जग व्यापक नँदनंदन।
माना मैं शरण नहिँ आया नँदनंदन,
तू ही तो था उर प्रेरक नँदनंदन।
माना मैंने पिछला बिगारा नँदनंदन,
माना मैं ना क्षमा अधिकारी नँदनंदन,
तू ही बता क्षमा कासों माँगूं नँदनंदन।
