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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 25 · 33/142

कीर्तन 1–50

कीर्तन 25 · Kirtan 25

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

58 source linesपुस्तक पृष्ठ 65–68PDF 82–85

तू ही तू ही तू ही तो है मेरा नँदनंदन,

मैं भी मैं भी मैं भी तो हूँ तेरा नँदनंदन।

तू ही मेरा तू ही मेरा स्वामी नँदनंदन,

तू ही मेरा तू ही मेरा सखा नँदनंदन।

तू ही मेरा तू ही मेरा सुत नँदनंदन,

Source page 66

तू ही मेरा तू ही मेरा पिय नँदनंदन।

तू ही मेरी गति मति रति नँदनंदन,

तेरे सिवा मेरा कोई नहिँ नँदनंदन।

तू ही मम माता पिता भ्राता नँदनंदन,

तेरा ही कहा हुआ है यह नँदनंदन।

मेरा सब कुछ ही है तेरा नँदनंदन,

तेरा सब कुछ भी है मेरा नँदनंदन।

माना मैं हूँ अति ही पतित नँदनंदन,

तू भी तो पतित पावन नँदनंदन।

पतितन सीने से लगावे नँदनंदन,

याही ते मैं आया द्वार तेरे नँदनंदन।

माना मैं हूँ अति दीन हीन नँदनंदन,

तू भी तो है दीनानाथ मम नँदनंदन।

माना नाना योनि में मैं घूमा नँदनंदन,

तू भी मेरे साथ-साथ घूमा नँदनंदन।

कृपा बिनु कारण करे नँदनंदन,

एइ सुनि आया हूँ शरण नँदनंदन।

माना मैं सदा से हूँ विमुख नँदनंदन,

किंतु हूँ तो तेरा ही मैं अंश नँदनंदन।

Source page 67

माना मैंने तुझको भुलाया नँदनंदन,

यामें तो है दोषी तेरी माया नँदनंदन।

तेरा मैं बनूँ ना बनूँ, मेरे नँदनंदन,

तू तो मेरा बन प्राणधन नँदनंदन।

माना मैंने जाना नहिं तोहिँ नँदनंदन,

तेरी कृपा बिनु जाना कौन नँदनंदन।

माना मैंने माया को न जीता नँदनंदन,

तेरी कृपा बिनु कौन जीता नँदनंदन।

माना मैंने भक्ति किया नहिं नँदनंदन,

तू तो बिनु हेतु सनेही नँदनंदन।

माना मैंने किया मनमाना नँदनंदन,

मन ते तो हारे ज्ञानी ध्यानी नँदनंदन।

माना मैंने किया सदा पाप नँदनंदन,

मेरे पाछे माया क्यों लगाया नँदनंदन।

माना मोह निशा में मैं सोया नँदनंदन,

तू तो उर था न क्यों जगाया नँदनंदन।

माना मैं हूँ बुरे से भी बुरा नँदनंदन,

हूँ तो तेरा लाज जाय तेरी नँदनंदन।

माना मन ते हूँ मैं तो हारा नँदनंदन,

Source page 68

तू है कैसा मन मोहन नँदनंदन।

माना मेरा मन है कुटिल नँदनंदन,

कुटिल था पूतना मनहुँ नँदनंदन।

तू तो बिनु सेवा के ही द्रवै नँदनंदन,

प्रणत ही पावे कृपा काहे नँदनंदन।

माना मैंने जग को ही भजा नँदनंदन,

तू भी तो है जग व्यापक नँदनंदन।

माना मैं शरण नहिँ आया नँदनंदन,

तू ही तो था उर प्रेरक नँदनंदन।

माना मैंने पिछला बिगारा नँदनंदन,

अगला तो अब तू बना दे नँदनंदन।

माना मैं ना क्षमा अधिकारी नँदनंदन,

तू ही बता क्षमा कासों माँगूं नँदनंदन।

माना मैं हूँ सब विधि दोषी नँदनंदन,

तू तो है “कृपालु” कृपा करु नँदनंदन।।

ब्रज रस माधुरी · भाग २033
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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