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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 48 · 56/142

कीर्तन 1–50

कीर्तन 48 · Kirtan 48

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

41 source linesपुस्तक पृष्ठ 126–128PDF 143–145

तू तो मेरी थी है रहेगी भी राधारानी।

(नथवारी रंगीली...)

तू तो मेरी थी है रहेगी भी राधारानी।

मैं भी तेरी थी हूँ रहूँगी भी राधारानी।

मेरी भूल थी जो भूला तोहिं राधारानी।

यह भूल थी अनादि मेरी राधारानी।

याते माया ने भुलाया मोहिं राधारानी।

मैंने आत्मा को माना तनु राधारानी।

याते तनु नाते माने नाते राधारानी।

तनु नाते क्षणभंगुर राधारानी।

जग वारे तो भिखारी सब राधारानी।

हम तो चह तव सुख राधारानी।

वह सुख देंगे तेरे जन राधारानी।

तेरी कृपा मिले तेरे जन राधारानी।

कृपा बिनु नहिं बने मेरी राधारानी।

तेरी कृपा हो प्रपन्न पर राधारानी।

ऐसी कृपा करु अब मेरी राधारानी।

Source page 127

हठी मन हो प्रपन्न तेरे राधारानी।

बुधि जाने तू है दीन प्रिय राधारानी।

किन्तु बुधि नहिं तजे मद राधारानी।

चौरासी लाख द्वार गये राधारानी।

सब द्वार माँगा सुख भीख राधारानी।

मिला भीख में दुखहि दुख राधारानी।

इमि बीते जन्म अगनित राधारानी।

अब जाना सुखघन तू है राधारानी।

ब्रह्मलोक तक सुख नहिं राधारानी।

मुक्तिहुँ सुख सुख नहिं राधारानी।

तेरी सेवा का ही सुख सुख राधारानी।

तेरे प्रेम ते ही मिले सेवा राधारानी।

तेरा प्रेम भी दे तेरा जन राधारानी।

निज जन ते दिला दे प्रेम राधारानी।

माना मन मेरा मायिक राधारानी।

तेरा जन ही करेगा दिव्य राधारानी।

साधन ते मिले न प्रेम राधारानी।

हौं तो शिशु अबोध तव राधारानी।

तू तो मन बुधि से भी पर राधारानी।

Source page 128

पुनि तोहिं कैसे जानें हम राधारानी।

पुनि बिनु जाने कैसे मानें राधारानी।

बिनु माने कैसे प्रेम होय राधारानी।

बिनु प्रेम नहिं होय कृपा राधारानी।

तेरी कृपा हो तो जानेें तोहि, राधारानी।

याते कृपा करु तू “कृपालु” राधारानी।

ब्रज रस माधुरी · भाग २056
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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