कीर्तन 1–50
कीर्तन 48 · Kirtan 48
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
तू तो मेरी थी है रहेगी भी राधारानी।
तू तो मेरी थी है रहेगी भी राधारानी।
मैं भी तेरी थी हूँ रहूँगी भी राधारानी।
मेरी भूल थी जो भूला तोहिं राधारानी।
यह भूल थी अनादि मेरी राधारानी।
याते माया ने भुलाया मोहिं राधारानी।
मैंने आत्मा को माना तनु राधारानी।
याते तनु नाते माने नाते राधारानी।
जग वारे तो भिखारी सब राधारानी।
वह सुख देंगे तेरे जन राधारानी।
तेरी कृपा मिले तेरे जन राधारानी।
कृपा बिनु नहिं बने मेरी राधारानी।
Source page 127
हठी मन हो प्रपन्न तेरे राधारानी।
बुधि जाने तू है दीन प्रिय राधारानी।
किन्तु बुधि नहिं तजे मद राधारानी।
चौरासी लाख द्वार गये राधारानी।
सब द्वार माँगा सुख भीख राधारानी।
मिला भीख में दुखहि दुख राधारानी।
ब्रह्मलोक तक सुख नहिं राधारानी।
मुक्तिहुँ सुख सुख नहिं राधारानी।
तेरी सेवा का ही सुख सुख राधारानी।
तेरे प्रेम ते ही मिले सेवा राधारानी।
तेरा प्रेम भी दे तेरा जन राधारानी।
निज जन ते दिला दे प्रेम राधारानी।
तेरा जन ही करेगा दिव्य राधारानी।
Source page 128
पुनि तोहिं कैसे जानें हम राधारानी।
पुनि बिनु जाने कैसे मानें राधारानी।
बिनु माने कैसे प्रेम होय राधारानी।
बिनु प्रेम नहिं होय कृपा राधारानी।
