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यार सो ह्वै गये नैना चार।
(नीको लागे...)
यार सो ह्वै गये नैना चार।
गइ हौं तन मन प्रानन हार।
सुनति रही गुनगन रिझवार।
सब कह छवि निधि नंदकुमार।
वा पर कोटि काम बलिहार।
मन कह तुम हूँ लखु रिझवार।
बुधि समुझाय थकी गइ हार।
इक दिन गइ हौं यमुना पार।
लखत रही तहँ यमुना धार।
आयो नागर नंदकुमार।
Source page 306
वाने कही सुनिय ब्रजनार।
हौं सुनि गइ ढिंग नंदकुमार।
दृग नीचे करि घूँघट डार।
हौं कह कहु का कह रिझवार।
लख्यो एक सपनो कह यार।
तो सो ह्वै गयो मेरो प्यार।
भयो ब्याहु पुनि तू भइ नार।
अब तुम बिनु रह कैसे यार।
तू भी करि ले मोते प्यार।
सखि कह सुनु वो लम्पट यार।
हौं तो हौं ब्याही परनार।
पुनि हौं इक पतिव्रत व्रत धार।
सो कह जो तू पतिव्रत नार।
तो क्यों डर टुक मोहिं निहार।
कत बोलति घूँघट पट डार।
यह सुनि आयो क्रोध अपार।
लखी वाय घूँघट पट टार।
लखतहिँ करि गयो बंटाढार।
लगि टकटकि इकटक दृग चार।
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पुनि वाने सैनन किये वार।
हौं नहिं सहि सक सो सुख यार।
पुलक कंप तनु दृग जल धार।
पुनि हौं कह सुनु पिय रिझवार।
मैंने झूठ कही पर नार।
हौं तो अब लौँ अहौ कुमार।
तोसों तो अब ह्वै गयो प्यार।
तूने ऐसा जादू डार।
तू ही तू दीखत संसार।
अब घर कैसे जावूँ यार।
यह सुनि आयो मो ढिंग यार।
दिये मोहिं गल बहिँयन डार।
पुनि लगाय उर कह बलिहार।
पुनि पुनि कह प्यारी रिझवार।
जब अब ही यह हाल हमार।
आगे कहा होयगो यार।
येहि यारी “कृपालु” बलिहार॥
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