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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 122 · 130/142

कीर्तन 101–134

कीर्तन 122 · Kirtan 122

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

47 source linesपुस्तक पृष्ठ 305–307PDF 322–324

यार सो ह्वै गये नैना चार।

(नीको लागे...)

यार सो ह्वै गये नैना चार।

गइ हौं तन मन प्रानन हार।

सुनति रही गुनगन रिझवार।

सब कह छवि निधि नंदकुमार।

वा पर कोटि काम बलिहार।

मन कह तुम हूँ लखु रिझवार।

बुधि समुझाय थकी गइ हार।

इक दिन गइ हौं यमुना पार।

लखत रही तहँ यमुना धार।

आयो नागर नंदकुमार।

Source page 306

वाने कही सुनिय ब्रजनार।

हौं सुनि गइ ढिंग नंदकुमार।

दृग नीचे करि घूँघट डार।

हौं कह कहु का कह रिझवार।

लख्यो एक सपनो कह यार।

तो सो ह्वै गयो मेरो प्यार।

भयो ब्याहु पुनि तू भइ नार।

अब तुम बिनु रह कैसे यार।

तू भी करि ले मोते प्यार।

सखि कह सुनु वो लम्पट यार।

हौं तो हौं ब्याही परनार।

पुनि हौं इक पतिव्रत व्रत धार।

सो कह जो तू पतिव्रत नार।

तो क्यों डर टुक मोहिं निहार।

कत बोलति घूँघट पट डार।

यह सुनि आयो क्रोध अपार।

लखी वाय घूँघट पट टार।

लखतहिँ करि गयो बंटाढार।

लगि टकटकि इकटक दृग चार।

Source page 307

पुनि वाने सैनन किये वार।

हौं नहिं सहि सक सो सुख यार।

पुलक कंप तनु दृग जल धार।

पुनि हौं कह सुनु पिय रिझवार।

मैंने झूठ कही पर नार।

हौं तो अब लौँ अहौ कुमार।

तोसों तो अब ह्वै गयो प्यार।

तूने ऐसा जादू डार।

तू ही तू दीखत संसार।

अब घर कैसे जावूँ यार।

यह सुनि आयो मो ढिंग यार।

दिये मोहिं गल बहिँयन डार।

पुनि लगाय उर कह बलिहार।

पुनि पुनि कह प्यारी रिझवार।

जब अब ही यह हाल हमार।

आगे कहा होयगो यार।

येहि यारी “कृपालु” बलिहार॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २130
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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