मन तेरो साँचो मीत गोपाल।
(नीको लागे...)
मन तेरो साँचो मीत गोपाल।
तेरो स्वामी सखा सुत पति गोपाल।
तू है अंश तेरा अंशी है गोपाल।
तू चह नित्य दिव्य सुख गोपाल।
तू चह सुख सुखघन गोपाल।
तू चह सुख भूमा गोपाल।
कर्म से मिलेगा नहिं सुख गोपाल।
योग से मिलेगा नहिं सुख गोपाल।
ज्ञान से मिलेगा नहिं सुख गोपाल।
कर्म का फल स्वर्ग दे गोपाल।
योग का फल सिद्धि दे गोपाल।
ज्ञान का फल मोक्ष दे गोपाल।
भक्ति का फल भक्ति दे गोपाल।
कर्म धर्म व्यर्थ बिनु भक्ति गोपाल।
योग रोग सम बिनु भक्ति गोपाल।
ज्ञान अज्ञान बिनु भक्ति गोपाल।
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कर्म वंदनीय भक्ति युक्त गोपाल।
योग वंदनीय भक्ति युक्त गोपाल।
ज्ञान वंदनीय भक्ति युक्त गोपाल।
कर्म नश्वर भक्ति नित्य गोपाल।
योग नश्वर भक्ति नित्य गोपाल।
ज्ञान नश्वर भक्ति नित्य गोपाल।
कर्म कठिन भक्ति सरल गोपाल।
योग कठिन भक्ति सरल गोपाल।
ज्ञान कठिन भक्ति सरल गोपाल।
माया न जाय बिनु भक्ति गोपाल।
ब्रह्म ज्ञान न हो बिनु भक्ति गोपाल।
केवल भक्ति से ही मिले गोपाल।
कर्म, योग, ज्ञान से न मिले गोपाल।
केवल भक्ति से ही द्रवै गोपाल।
कर्म फल स्वर्ग भी दे भक्ति गोपाल।
योग फल सिद्धि भी दे भक्ति गोपाल।
ज्ञान फल मोक्ष भी दे भक्ति गोपाल।
जो भी दुर्लभ भक्ति दे गोपाल।
जो भी अलभ्य भक्ति दे गोपाल।
Source page 97
भक्तोँ की संभार करेँ नित गोपाल।
भक्तोँ को दे ब्रह्म ज्ञान गोपाल।
भक्तोँ के पाछे पाछे चलेँ गोपाल।
भक्तोँ के हाथ बिकेँ मदन गोपाल।
भक्तोँ के पाप पुण्य नासेँ गोपाल।
भक्तोँ के तीनोँ कर्म नासेँ गोपाल।
भक्तोँ के पंचक्लेश मेटे गोपाल।
भक्तोँ के पंचकोश नासे गोपाल।
भक्तोँ के वश महँ रह गोपाल।
भक्तोँ की पद रज चह गोपाल।
भक्तोँ की रुचि राखें गोपाल।
भक्तोँ की भक्ति करें गोपाल।
भक्तोँ को प्राण प्रिय कह गोपाल।
भक्तोँ को निज रूप कह गोपाल।
भक्त जैसा चाहे, वैसा नाचे गोपाल।
हौं हूँ “कृपालु” चह भक्ति गोपाल॥