लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content

ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 126 · 134/142

कीर्तन 101–134

कीर्तन 126 · Kirtan 126

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

36 source linesपुस्तक पृष्ठ 314–315PDF 331–332

सुनु ओरी गोरी तोरी मोरी भल जोरी।

(नथवारी रंगीली...)

सुनु ओरी गोरी तोरी मोरी भल जोरी।

जा जा जा री फबे नहिं तोरी मोरी जोरी।

तू है कारो कारो मैं हूँ गोरी गोरी गोरी।

तेरी कारी करतूत जाने सब गोरी।

तू घर घर कर माखन चोरी।

तू सब सोइ कह मोरी जोरी।

तोहिं जार सरदार माने सब गोरी।

या ब्रज में न बने कोउ तोरी जोरी।

तूने काउ चित चोरी काउ लर तोरी।

तूने काउ पट चोरी काउ घट फोरी।

बनि जाय भिखारी लखि ब्रज गोरी।

प्यार करे पुनि तजे ढूँढ़े और गोरी।

तो को नेकु नहिं डर लोक वेद को री।

तोहि लंपट माने सब ब्रज गोरी।

कोउ कारी कुबरी बनेगी तोरी जोरी।

तेरो तन कारो मन कारो जाने गोरी।

Source page 315

पछतायेगी बनेगी जोरी तोरी जोरी।

तेरी जोरी ते तो भल रह क्वांरी गोरी।

तूने बलि को छला था जानें ब्रज गोरी।

तूने छुपि मारा बाली जानें सब गोरी।

तूने सीता को तजा था जानें ब्रज गोरी।

तूने छलि मारा कौरव जानें गोरी।

तेरा उर है कठोर बज्र जानें गोरी।

तू न जाने पर पीर जानें सब गोरी।

जा के फूटे भाग सोइ बने तोरी जोरी।

ब्रज बने नित नई नई तोरी जोरी।

तू न भयो निज माता देवकी को री।

तू न भयो निज पिता वसुदेव को री।

तजि कारागार गयो गोकुल को री।

तूने छोड़ा नहिं निज सुत विधि को री।

तूने बना दिया गोपी शंकर को री।

तूने बना दिया कपि नारद को री।

तूने छोड़ा नहिँ बानी भवानी को री।

तूने छोड़ा नहिं निज कमला को री।

तू ही है “कृपालु” बस इक तोरी जोरी॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २134
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

Related official book listing · Official full collection · Official author website · Read as text