कीर्तन 101–134
कीर्तन 126 · Kirtan 126
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
सुनु ओरी गोरी तोरी मोरी भल जोरी।
सुनु ओरी गोरी तोरी मोरी भल जोरी।
जा जा जा री फबे नहिं तोरी मोरी जोरी।
तू है कारो कारो मैं हूँ गोरी गोरी गोरी।
या ब्रज में न बने कोउ तोरी जोरी।
तूने काउ चित चोरी काउ लर तोरी।
प्यार करे पुनि तजे ढूँढ़े और गोरी।
तो को नेकु नहिं डर लोक वेद को री।
Source page 315
पछतायेगी बनेगी जोरी तोरी जोरी।
तेरी जोरी ते तो भल रह क्वांरी गोरी।
तूने बलि को छला था जानें ब्रज गोरी।
तूने छुपि मारा बाली जानें सब गोरी।
तूने सीता को तजा था जानें ब्रज गोरी।
तूने छलि मारा कौरव जानें गोरी।
तेरा उर है कठोर बज्र जानें गोरी।
तू न जाने पर पीर जानें सब गोरी।
जा के फूटे भाग सोइ बने तोरी जोरी।
तू न भयो निज माता देवकी को री।
तू न भयो निज पिता वसुदेव को री।
तूने छोड़ा नहिं निज सुत विधि को री।
तूने बना दिया गोपी शंकर को री।
तूने छोड़ा नहिँ बानी भवानी को री।
