कीर्तन 1–50
कीर्तन 1 · Kirtan 1
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
गुरु चरण कमल बलिहार, गुरु पर तन मन धन वार।
गुरु चरण कमल बलिहार, गुरु पर तन मन धन वार।
गुरु चरण धूरि सिर धार, गुरु महिमा अपरंपार॥
सद्गुरु भज नंदकुमार, हरि भज सद्गुरु सरकार।
दोउ कह दोउ प्राण हमार, गुरु महिमा अपरंपार॥
गुरु रह उर नंदकुमार, गुरु उर रह हरि रिझवार।
दोउ करुणा को भंडार, गुरु महिमा अपरंपार॥
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गुरु मिले कृपा रिझवार, गुरु कृपा मिले सरकार।
दोउ कृपा रूप साकार, गुरु महिमा अपरंपार॥
गुरु कह भजु नंदकुमार, गुरु कहँ भजु कह रिझवार।
दोउ दास्य धर्म उर धार, गुरु महिमा अपरंपार॥
गुरु पतितन सों कर प्यार, हरि निर्मल जन को यार।
यह अंतर सुजन विचार, गुरु महिमा अपरंपार॥
यह है भवसिंधु अपार, नर देह नाव अनुहार।
नाविक सद्गुरु सरकार, गुरु महिमा अपरंपार॥
