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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 1 · 9/142

कीर्तन 1–50

कीर्तन 1 · Kirtan 1

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

19 source linesपुस्तक पृष्ठ 1–2PDF 18–19

गुरु चरण कमल बलिहार, गुरु पर तन मन धन वार।

(हैं बाँको सुन्दर...)

गुरु चरण कमल बलिहार, गुरु पर तन मन धन वार।

गुरु चरण धूरि सिर धार, गुरु महिमा अपरंपार॥

सद्गुरु भज नंदकुमार, हरि भज सद्गुरु सरकार।

दोउ कह दोउ प्राण हमार, गुरु महिमा अपरंपार॥

गुरु रह उर नंदकुमार, गुरु उर रह हरि रिझवार।

दोउ करुणा को भंडार, गुरु महिमा अपरंपार॥

गुरु चह सुख नंद कुमार, गुरुवर सुख चह रिझवार।

हरि गुरु दोउ प्राणाधार, गुरु महिमा अपरंपार।।

Source page 2

गुरु मिले कृपा रिझवार, गुरु कृपा मिले सरकार।

दोउ कृपा रूप साकार, गुरु महिमा अपरंपार॥

गुरु कह भजु नंदकुमार, गुरु कहँ भजु कह रिझवार।

दोउ दास्य धर्म उर धार, गुरु महिमा अपरंपार॥

गुरु पतितन सों कर प्यार, हरि निर्मल जन को यार।

यह अंतर सुजन विचार, गुरु महिमा अपरंपार॥

यह है भवसिंधु अपार, नर देह नाव अनुहार।

नाविक सद्गुरु सरकार, गुरु महिमा अपरंपार॥

जो समझा दे श्रुति सार, उर भरा प्रेम रिझवार।

सोइ है सद्गुरु सरकार, गुरु सोइ “कृपालु” सरकार॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २009
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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