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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 73 · 81/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 73 · Kirtan 73

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

40 source linesपुस्तक पृष्ठ 181–183PDF 198–200

हमारे मन भाय गईं राधारानी।

(हमारी राधेरानी रस...)

हमारे मन भाय गईं राधारानी।

हमारी राधारानी अवढर दानी।

जगत जननी जो राधारानी।

बनायो सोइ माय कीरति महरानी।

बनायो पितु भानुहिं राधारानी।

बसें बरसानो राधारानी।

बिहर वृंदावन राजधानी।

श्री राधारानी सम हैं राधारानी।

न जानी महिमा चक्रपानी।

कृपा की मूरति राधारानी।

सरल अति प्यारी राधारानी।

प्रेम रस खानी राधारानी।

सुभायन भोरी राधारानी।

रूप रस खानी राधारानी।

श्रीराधा छवि लखि छविहूँ दिवानी।

लुटावति ब्रजरस राधारानी।

Source page 182

बने ब्रजरस हित शिव शिवानी।

सकल जग दानी हूँ की दानी।

स्वामिनी अपनी श्याम मानी।

करें अगवानी चक्र पानी।

करति जय जयकार चक्रपानी।

रहत नित रिझवत चक्रपानी।

तकति नित भृकुटिन चक्रपानी।

डरत जाके डर चक्रपानी।

चरण रज याचत चक्रपानी।

चरण चापें नित चक्र पानी।

धरत हरि सिर पग राधारानी।

लली लखि मुर्छित चक्रपानी।

टहल चह हरि महलन महरानी।

कोटि कमला याय नौकरानी।

उतारति आरति कमला वानी।

करें अस्तुति नित कोटि वानी।

बनी वनचरि सखि राधारानी।

सरल चित प्रिय नित राधारानी।

प्रणत जन प्रिय नित राधारानी।

Source page 183

दीन जन प्रिय नित राधारानी।

पतित जन प्रिय नित राधारानी।

करुण क्रंदन प्रिय राधारानी।

“कृपालु” नहिं जैसी राधारानी।

ब्रज रस माधुरी · भाग २081
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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