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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 100 · 108/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 100 · Kirtan 100

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

37 source linesपुस्तक पृष्ठ 251–253PDF 268–270

जा जा जा जा जा जा

(नथवारी रंगीली...)

जा जा जा जा जा जा

जार जा जा कुब्जा यार।

तेरी झूठी मूठी यारी तेरा झूठा मूठा प्यार।

तू तो निकला लबरन को सरदार।

अब जानी तोहिं सबरी ब्रज की नार।

तेरी वाणी है मधुर मोर वाणी अनुहार।

उर कपट मोर जनु अहिन अहार।

Source page 252

तेरी बनि जाय चाहे और कुब्जा हजार।

तेरी थीं तेरी हो के रहेंगी ब्रजनार।

ब्रजनार नहिं चह कुब्जा जनु प्यार।

हम तो हैं अकाम सब ब्रज की नार।

मम रोम रोम रम रह मम यार।

है हम सब का निष्काम प्यार।

मेरे नैनन में बस मेरा यार।

हम जानति प्रेम अधीन यार।

मेरे मन में नित बस मेरा यार।

दसहूँ दिशि दीखे मेरा यार।

हम चह न मुक्ति पाँचहुँ प्रकार।

हम नहिं चह बैकुण्ठहुँ ब्रजनार।

हम तो चह सेवा निज रिझवार।

पिय इच्छा ही इच्छा ब्रजनार।

पिय ठुकराये अथवा करे प्यार।

क्षण क्षण है वर्धमान मम प्यार।

पिय है पतंग डोरी मम प्यार।

हम देत चुनौती तोहिं रिझवार।

तू उलटा भी कर ले व्यवहार।

Source page 253

पिय सुख मम सुख मम व्रत उर धार।

मोते हारा नित मेरा यार।

हम जानति पिय क्यों लिय अवतार।

हम उनकी लीला पर बलिहार।

सुवरन तपि अगिनि चमक अति धार।

ऐसेहिं विरहिन गोपिन बढ़ प्यार।

हम पिय निष्ठुरता पर बलिहार।

ब्रज तजि नहिं जा सक मेरा यार।

उन में मैं मुझ में मेरा यार।

वे ही मेरे “कृपालु” भरतार॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २108
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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