जा जा जा जा जा जा
(नथवारी रंगीली...)
जा जा जा जा जा जा
जार जा जा कुब्जा यार।
तेरी झूठी मूठी यारी तेरा झूठा मूठा प्यार।
तू तो निकला लबरन को सरदार।
अब जानी तोहिं सबरी ब्रज की नार।
तेरी वाणी है मधुर मोर वाणी अनुहार।
उर कपट मोर जनु अहिन अहार।
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तेरी बनि जाय चाहे और कुब्जा हजार।
तेरी थीं तेरी हो के रहेंगी ब्रजनार।
ब्रजनार नहिं चह कुब्जा जनु प्यार।
हम तो हैं अकाम सब ब्रज की नार।
मम रोम रोम रम रह मम यार।
है हम सब का निष्काम प्यार।
मेरे नैनन में बस मेरा यार।
हम जानति प्रेम अधीन यार।
मेरे मन में नित बस मेरा यार।
दसहूँ दिशि दीखे मेरा यार।
हम चह न मुक्ति पाँचहुँ प्रकार।
हम नहिं चह बैकुण्ठहुँ ब्रजनार।
हम तो चह सेवा निज रिझवार।
पिय इच्छा ही इच्छा ब्रजनार।
पिय ठुकराये अथवा करे प्यार।
क्षण क्षण है वर्धमान मम प्यार।
पिय है पतंग डोरी मम प्यार।
हम देत चुनौती तोहिं रिझवार।
तू उलटा भी कर ले व्यवहार।
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पिय सुख मम सुख मम व्रत उर धार।
मोते हारा नित मेरा यार।
हम जानति पिय क्यों लिय अवतार।
हम उनकी लीला पर बलिहार।
सुवरन तपि अगिनि चमक अति धार।
ऐसेहिं विरहिन गोपिन बढ़ प्यार।
हम पिय निष्ठुरता पर बलिहार।
ब्रज तजि नहिं जा सक मेरा यार।
उन में मैं मुझ में मेरा यार।
वे ही मेरे “कृपालु” भरतार॥