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लाल कह मैया अस ब्रज बाल।
(नीको लागे...)
लाल कह मैया अस ब्रज बाल।
जस नहिं कतहूँ तीनिहुँ काल।
ये अति मति कपटिन ब्रजबाल।
Source page 221
मैं तो तेरा भोला लाल।
इनके उर विष वचन रसाल।
हौं न जानि सक इनकी चाल।
मोको इकलो लखि ब्रजबाल।
टेरि बुलावति सुनियो लाल।
पुनि कह इक विनती नंदलाल।
आजु चलहु हमरेहुँ घर लाल।
खाय नवनि मोहिं करहु निहाल।
साँचो मानि जाउँ हौँ हाल।
पुनि लें घेरि मोहिं ब्रजबाल।
सब मारें गुलचन मम गाल।
पुनि सब चूमें मुख ब्रजबाल।
कोउ चूमें कर कोउ मम गाल।
पुनि कह नाच दिखावहु लाल।
नाचत थकि गयो तेरो लाल।
कोउ छोरति मम मुरलि रसाल।
कोउ छोरति मम गल वनमाल।
कोउ छोरति पीतांबर बाल।
कोउ छोरति कठुला ब्रजबाल।
Source page 222
कोउ कह मोर मुकुट दो लाल।
कोउ पुनि पुनि चिपटावति बाल।
तोरी शपथ खवावति हाल।
कहति कहहु ऐहौं पुनि काल।
तबहुँ न दे माखन ब्रजबाल।
दैहौं दैहौं कह ब्रजबाल।
पुनि लगाव माखन मुख गाल।
पुनि दै ताल हँसति ब्रजबाल।
कह पुनि बारेक नाचहु लाल।
अबकी मोर नृत्य करु लाल।
मो सँग नाचेँ सब ब्रजबाल।
पुनि देँ कछु माखन ब्रजबाल।
कछु माखन लगाव कर गाल।
पुनि कर पकरि सबै ब्रजबाल।
तव ढिंग लै आवहिं ब्रजबाल।
तो सों कह चोरी कर लाल।
तू ऊखल बाँधति तत्काल।
तू भोरी न जान इन चाल।
ये बिनु एक सात करें बाल।
Source page 223
ये धींगरि कोटिन ब्रजबाल।
हौं “कृपालु” इकलो पुनि बाल॥
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