मन करु सुमिरन यशुदा को ललन।
(मन करु सुमिरन...)
मन करु सुमिरन यशुदा को ललन।
यशुदा को ललन नंदराय सुवन।
जो है सतघन चितघन आनँदघन।
जोइ गोपी जन जीवन नँदनन्दन।
जोइ मदन विमोहन धन रसिकन।
जोइ रास किये सँग ब्रज सखियन।
जोइ किय ब्रज युवतिन चीर हरन।
जोइ किय सुरपति को गर्वहरन।
जोइ किय ब्रह्मा बुधि मद मर्दन।
जोइ नख धार्यो गिरि गोवर्धन।
जाको दिव्य नीलमणि नील बरन।
जाकी दामिनि दुति जनु नील दुति तन।
जाकी सुवरन मुकुट मणिन दुति घन।
जाकी मोर मुकुट लटकनि हरे मन।
जाकी लट घुँघुरारी कारी मन भावन।
जाकी भाल तिलक दृग मद दमकन।
Source page 93
जाकी कनकन कुंडल दुति रत्नन।
जाके कजरारे रतनारे प्यारे नयन।
जाके सरस रसीले गँसीले दृगन।
जाकी जादू भरी अति चंचल चितवन।
जाकी नासा बेसर की हलकन।
जाकी दसनन दुति दमकनि आनन।
जाकी मुरि मुरि मधुर मधुर मुसकन।
जाकी कर मणि दुति दमकनि कंकन।
जाको कर कंकन बाजे खननननन।
जाकी अँगुरिन मुँदरिन दुति हीरन।
जाके उर पीताम्बर की फहरन।
जाके गर लर मोतिन की लहरन।
जाके गल भल गुंजमाल लटकन।
जाके गल बनमाल पाँच पुष्पन।
जाके वक्षस्थल भृगु विप्र चरन।
जाके कटि सोहति किंकिनि कनकन।
जाकी कटि किंकिनि बाजे झननननन।
जाकी पीताम्बर झलमल झलकन।
जाके नूपुर सोहत दोउ चरनन।
Source page 94
जाको नूपुर बाजे छूम छननननन।
जाकी पद नखमणि दुति जनु शशिगन।
जाकी चरण अरुणिमा मनमोहन।
जाकी मत्त गयंद लजाव गवन।
जाके रोम रोम ब्रजरस की झरन।
जाको लखि भूले ज्ञानिन निज सुधि तन।
जाको लखि धार्यो शिव गोपी तन।
जाके क्षण क्षण वर्धमान रस तन।
जाकी नित्य नवायमान छवि तन।
जाकी छविहूँ लाजति लखि छवि तन।
जाकी छवि कन्दर्प दर्प मर्दन।
जाकी छवि उनहुँन मन की मोहन।
जाकी छवि चोरे चित्त परमहंसन।
जाको लखि बाढ़ै और प्यास दरसन।
जाको लखि वारौं कोटिन मुक्ति सुखन।
जाकी मोहे ब्रह्मादि मुरलि वादन।
जाकी तनु छवि सों “कृपालु” लाली छवि तन॥