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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 56 · 64/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 56 · Kirtan 56

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

52 source linesपुस्तक पृष्ठ 144–146PDF 161–163

मन करु सुमिरन राधा, हैं जीवन धन राधा।

(हैं बाँको सुन्दर...)

मन करु सुमिरन राधा, हैं जीवन धन राधा।

श्यामहुँ स्वामिनि राधा, जय जयति जयति राधा॥

गहु चरण शरण राधा, भव बाधा हर राधा।

चह हरिहुँ कृपा राधा, जय जयति जयति राधा॥

तेरी गति हैं राधा, तेरी मति हैं राधा।

तेरी रति हैं राधा, जय जयति जयति राधा॥

रटु नित्य नाम राधा, नित गाउ गुनन राधा।

नित ध्यावहु छवि राधा, जय जयति जयति राधा॥

मन ते सुमिरहु राधा, रसना ते रटु राधा।

सब में लखु श्री राधा, जय जयति जयति राधा॥

जो सुमिरत नित राधा, वाको रक्षति राधा।

वा पाछे चल राधा, जय जयति जयति राधा॥

देखहु तो छवि राधा, सुनु तो बैनन राधा।

परसहु तो पद राधा, जय जयति जयति राधा॥

सूँघहु तो पद राधा, लो रस पद रज राधा।

सोचहु तो नित राधा, जय जयति जयति राधा॥

Source page 145

हरि नैनन बस राधा, हरि उर बिच बस राधा।

हरि रोम रोम राधा, जय जयति जयति राधा॥

हरि आगे लख राधा, हरि पाछे लख राधा।

हरि जित लख तित राधा, जय जयति जयति राधा॥

हरि गाव मुरलि राधा, हरि आधा बिनु राधा।

हरि देह प्राण राधा, जय जयति जयति राधा॥

बाहर गोरी राधा, भीतर श्यामल राधा।

दोऊ एक श्याम राधा, जय जयति जयति राधा॥

आगे चल मम राधा, हरि पाछे चल राधा।

हरि पाछे सखि राधा, जय जयति जयति राधा॥

विधि हरि हर भज राधा, भज उमा रमा राधा।

भज ब्रज बनितन राधा, जय जयति जयति राधा॥

बरसाने में राधा, वृंदावन में राधा।

मनगढ़ में भी राधा, जय जयति जयति राधा॥

सब जग में भी राधा, जीवों में भी राधा।

भक्तों में भी राधा, जय जयति जयति राधा॥

नास्तिक में भी राधा, आस्तिक में भी राधा।

जड़ जंगम में राधा, जय जयति जयति राधा॥

भज ज्ञानी जन राधा, भज योगी जन राधा।

Source page 146

भज कर्मी जन राधा, जय जयति जयति राधा॥

जग सृष्टि करें राधा, जग पालन कर राधा।

जग प्रलय करें राधा, जय जयति जयति राधा॥

करु णावतार राधा, रस प्रेम सार राधा।

राधा समान राधा, जय जयति जयति राधा॥

अवढर दानी राधा, ब्रजरस खानी राधा।

ब्रज ठकुरानी राधा, जय जय “कृपालु” राधा॥

(हैं बाँको सुन्दर...)

जय हो जय हो जय हो राधा,

जय हो जय हो जय हो राधा।

जय हो जय हो जय हो राधा,

जय हो जय हो जय हो राधा॥

पूरब पश्चिम राधा, उत्तर दक्षिण राधा।

ऊपर नीचे राधा, जहँ देखो तहँ राधा।।

सोवहु सुमिरहु राधा, जागहु सुमिरहु राधा।

गावहु सुमिरहु राधा, नित ही सुमिरहु राधा।।

ब्रज रस माधुरी · भाग २064
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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