कीर्तन 51–100
कीर्तन 56 · Kirtan 56
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मन करु सुमिरन राधा, हैं जीवन धन राधा।
मन करु सुमिरन राधा, हैं जीवन धन राधा।
श्यामहुँ स्वामिनि राधा, जय जयति जयति राधा॥
गहु चरण शरण राधा, भव बाधा हर राधा।
चह हरिहुँ कृपा राधा, जय जयति जयति राधा॥
तेरी गति हैं राधा, तेरी मति हैं राधा।
तेरी रति हैं राधा, जय जयति जयति राधा॥
रटु नित्य नाम राधा, नित गाउ गुनन राधा।
नित ध्यावहु छवि राधा, जय जयति जयति राधा॥
मन ते सुमिरहु राधा, रसना ते रटु राधा।
सब में लखु श्री राधा, जय जयति जयति राधा॥
जो सुमिरत नित राधा, वाको रक्षति राधा।
वा पाछे चल राधा, जय जयति जयति राधा॥
देखहु तो छवि राधा, सुनु तो बैनन राधा।
परसहु तो पद राधा, जय जयति जयति राधा॥
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हरि नैनन बस राधा, हरि उर बिच बस राधा।
हरि रोम रोम राधा, जय जयति जयति राधा॥
हरि आगे लख राधा, हरि पाछे लख राधा।
हरि जित लख तित राधा, जय जयति जयति राधा॥
हरि गाव मुरलि राधा, हरि आधा बिनु राधा।
हरि देह प्राण राधा, जय जयति जयति राधा॥
बाहर गोरी राधा, भीतर श्यामल राधा।
दोऊ एक श्याम राधा, जय जयति जयति राधा॥
आगे चल मम राधा, हरि पाछे चल राधा।
हरि पाछे सखि राधा, जय जयति जयति राधा॥
विधि हरि हर भज राधा, भज उमा रमा राधा।
भज ब्रज बनितन राधा, जय जयति जयति राधा॥
बरसाने में राधा, वृंदावन में राधा।
मनगढ़ में भी राधा, जय जयति जयति राधा॥
सब जग में भी राधा, जीवों में भी राधा।
भक्तों में भी राधा, जय जयति जयति राधा॥
नास्तिक में भी राधा, आस्तिक में भी राधा।
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भज कर्मी जन राधा, जय जयति जयति राधा॥
जग सृष्टि करें राधा, जग पालन कर राधा।
जग प्रलय करें राधा, जय जयति जयति राधा॥
करु णावतार राधा, रस प्रेम सार राधा।
राधा समान राधा, जय जयति जयति राधा॥
अवढर दानी राधा, ब्रजरस खानी राधा।
ब्रज ठकुरानी राधा, जय जय “कृपालु” राधा॥
पूरब पश्चिम राधा, उत्तर दक्षिण राधा।
ऊपर नीचे राधा, जहँ देखो तहँ राधा।।
