कीर्तन 101–134
कीर्तन 123 · Kirtan 123
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
वाने जाने कैसा जादू किया पिया जादूगर।
वाने जाने कैसा जादू किया पिया जादूगर।
मैं तो मरि गई लखतहिं वाय नटवर।
मैं तो जा रही थी यमुना ते जल घट भर।
मारी मोरी गागरि काँकरि जादूगर।
मैंने देखा पाछे मुसकाता दीखा नटवर।
मारी नैन सैन जाने कैसी सोइ जादूगर।
मेरे रोम रोम प्रेम रस वाने दिया भर।
मैं तो गिरी भू पै कहि हाय हाय जादूगर।
पुनि मुरलि बजाई वाने धरि के अधर।
आई चेतना तो देखा आगे खड़ा जादूगर।
कही क्षमा करु गोरी तोरी फोरी गागर।
उर ते लगायो मोय मग महँ जादूगर।
Source page 309
कही मैया तरु पर बैठ्यो इक वानर।
मैंने मारी वाय तकि तरु इक काँकर।
जानि जानि के न मार्यो मैया कह जादूगर।
पुनि कह माय दै दे याय नई गागर।
मैं तो गागरी पाई लाई पुनि जल भर।
कहाँ जावूँ कासोँ कहूँ जार प्यार जादूगर।
पुनि पुनि तनु काँपे दोउ दृग जल भर।
जित देखूँ तित दीखे सोइ सोइ जादूगर।
दृग ठाने हठ माने न दिखा दे सो लँगर।
कैसे वाय समझावूँ झरे दृग झरझर।
याय कहा है गयो है कहे मम गूजर।
सास कहे या पै जादू किया काऊ जादूगर।
