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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 123 · 131/142

कीर्तन 101–134

कीर्तन 123 · Kirtan 123

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

35 source linesपुस्तक पृष्ठ 308–309PDF 325–326

वाने जाने कैसा जादू किया पिया जादूगर।

(नथवारी रंगीली...)

वाने जाने कैसा जादू किया पिया जादूगर।

मैं तो मरि गई लखतहिं वाय नटवर।

मैं तो जा रही थी यमुना ते जल घट भर।

मारी मोरी गागरि काँकरि जादूगर।

मैंने देखा पाछे मुसकाता दीखा नटवर।

मारी नैन सैन जाने कैसी सोइ जादूगर।

मेरे रोम रोम प्रेम रस वाने दिया भर।

मैं तो गिरी भू पै कहि हाय हाय जादूगर।

पुनि मुरलि बजाई वाने धरि के अधर।

आई चेतना तो देखा आगे खड़ा जादूगर।

कही क्षमा करु गोरी तोरी फोरी गागर।

दउँ नई गागरि नागरि चलु घर।

गइ नई गागरि हित जादूगर घर।

उर ते लगायो मोय मग महँ जादूगर।

पुनि जैसे तैसे हौँ हूँ गइ जादूगर घर।

तहँ मैया ते बनाई झूठी बात जादूगर।

Source page 309

कही मैया तरु पर बैठ्यो इक वानर।

मैंने मारी वाय तकि तरु इक काँकर।

तबै आई नागरि सिर धरि गागर।

काँकरि लागी फूटी नागरि गागर।

जानि जानि के न मार्यो मैया कह जादूगर।

पुनि कह माय दै दे याय नई गागर।

मैं तो गागरी पाई लाई पुनि जल भर।

पुनि सिर धरि गागरि गइ निज घर।

अब न परत मोहिं कल पल भर।

कहाँ जावूँ कासोँ कहूँ जार प्यार जादूगर।

पुनि पुनि तनु काँपे दोउ दृग जल भर।

जित देखूँ तित दीखे सोइ सोइ जादूगर।

दृग ठाने हठ माने न दिखा दे सो लँगर।

कैसे वाय समझावूँ झरे दृग झरझर।

याय कहा है गयो है कहे मम गूजर।

सास कहे या पै जादू किया काऊ जादूगर।

काऊ ओझा ते झरावो जादू जायगो उतर।

सो उतारे जो कियो “कृपालु” जादू जादूगर॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २131
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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