कीर्तन 51–100
कीर्तन 71 · Kirtan 71
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
वो बरसाने वारी, वो सुख घन तन वारी।
वो बरसाने वारी, वो सुख घन तन वारी।
वो गौर वरन वारी, दो प्रेम सुधा प्यारी॥
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वो श्रुति कुंडल वारी, वो दीर्घ दृगन वारी।
वो दृग काजर वारी, दो प्रेम सुधा प्यारी॥
वो नासा नथवारी, वो भल बेसर वारी।
वो अरुण अधर वारी, दो प्रेम सुधा प्यारी॥
वो दशनन दुति वारी, वो मृदु मुसुकनि वारी।
वो मृदु बोलनि वारी, दो प्रेम सुधा प्यारी॥
वो कर कंकन वारी, वो कर चूरिन वारी।
वो कर पहुँची वारी, दो प्रेम सुधा प्यारी॥
वो कर मेहँदी वारी, वो मणि मुँदरिन वारी।
वो वरद हस्त वारी, दो प्रेम सुधा प्यारी॥
वो मणि माला वारी, वो मुक्त माला वारी।
वो उर कंचुकि वारी, दो प्रेम सुधा प्यारी॥
वो नीलांबर वारी, वो मणि किंकिणि वारी।
वो पग पायल वारी, दो प्रेम सुधा प्यारी॥
