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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 71 · 79/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 71 · Kirtan 71

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

21 source linesपुस्तक पृष्ठ 176–177PDF 193–194

वो बरसाने वारी, वो सुख घन तन वारी।

(हैं बाको सुन्दर...)

वो बरसाने वारी, वो सुख घन तन वारी।

वो गौर वरन वारी, दो प्रेम सुधा प्यारी॥

वो कनक मुकुट वारी, वो चंद्रकला वारी।

वो शीशफूल वारी, दो प्र्रेम सुधा प्यारी॥

Source page 177

वो श्रुति कुंडल वारी, वो दीर्घ दृगन वारी।

वो दृग काजर वारी, दो प्रेम सुधा प्यारी॥

वो नासा नथवारी, वो भल बेसर वारी।

वो अरुण अधर वारी, दो प्रेम सुधा प्यारी॥

वो दशनन दुति वारी, वो मृदु मुसुकनि वारी।

वो मृदु बोलनि वारी, दो प्रेम सुधा प्यारी॥

वो कर कंकन वारी, वो कर चूरिन वारी।

वो कर पहुँची वारी, दो प्रेम सुधा प्यारी॥

वो कर मेहँदी वारी, वो मणि मुँदरिन वारी।

वो वरद हस्त वारी, दो प्रेम सुधा प्यारी॥

वो मणि माला वारी, वो मुक्त माला वारी।

वो उर कंचुकि वारी, दो प्रेम सुधा प्यारी॥

वो नीलांबर वारी, वो मणि किंकिणि वारी।

वो पग पायल वारी, दो प्रेम सुधा प्यारी॥

वो बिछुवनि छवि वारी, वो पग जावक वारी।

वो हंस गवनि वारी, सो मम “कृपालु” प्यारी॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २079
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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