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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 124 · 132/142

कीर्तन 101–134

कीर्तन 124 · Kirtan 124

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

21 source linesपुस्तक पृष्ठ 310–311PDF 327–328

सखि नटखट नंदकुमार, हैं जादूगर सरदार।

(हैं बाको सुन्दर...)

सखि नटखट नंदकुमार, हैं जादूगर सरदार।

मो पै अस जादू डार, मैं भूलि गई घर बार॥

मैं लखि रहि यमुना धार, आये तहँ सोइ ठगहार।

औचक ह्वै गये दृग चार, किय वाने सैनन वार॥

सो सैन भई उर पार, हौं तन मन सब गइ हार।

पुनि आयो ढिंग रिझवार, कह हौं ही साँचो यार॥

पुनि घूँघट दियो उघार, भेंट्यो बरबस रिझवार।

हौं सुधि बुधि देह बिसार, मुर्छित गिरि धरणि मझार॥

मोहिं मुर्छित लखि बटमार, लिय तान मुरलि रिझवार।

सुनि तान समाधि बिसार, उठि बैठी चितवति यार॥

पुनि सो लबरन सरदार, किय नैनन सैनन वार।

पुनि कह तू करि ले प्यार, यह जीवन है दिन चार॥

हौं हाँ या ना न उचार, पुनि लखन लगी जल धार।

मन कह पुनि वाय निहार, तजु लोक लाज ब्रजनार॥

उत सों गयो यमुना पार, इत हौं रहि वाय निहार।

कैसेहुँ सुधि देह सँभार, घर गई करि बंटाढार॥

Source page 311

अब खारो लग संसार, जित देखूँ दीखत यार।

उर मधुर वेदना धार, नस नस बस रस रिझवार॥

कासोँ कह जारहिं प्यार, हँसिहैं सब दै कर तार।

जो होनी थी भइ यार, तो पर “कृपालु” बलिहार॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २132
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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