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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 124 · 128/129

कीर्तन 101–125

कीर्तन 124 · Kirtan 124

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

18 source linesपुस्तक पृष्ठ 192PDF 203

चलो बरसाने मिले बरसाने वारी,

बोलो जय होे जय हो वृषभानुदुलारी।

गोरी गोरी भोरी भारी महतारी,

नित्य किशोरी ब्रजरस बोरी प्यारी।

वयस की थोरी पिय चित चोरी प्यारी,

रति रस बोरी गति मति मोरी प्यारी।

चोरी चोरी चित चोरु चित चोरी प्यारी,

तू ही तो है मोरी लखु मोरी ओरी प्यारी।

रोके बुलाओ मन भानुदुलारी,

भाजि भाजि अइहै करुणामयी प्यारी।

रोके कहु मैं हूँ शिशु तू ही माँ है प्यारी,

जग हों कुपूत कुमाता नहिं प्यारी।

इक बार कहु मैं ही तेरी महतारी,

सेवा दे दे महल की दऊँगी बुहारी।

अवशि मिलेगी सेवा महलन वारी,

दीखेंगे बिहारी तहँ देत बुहारी।

सदा ही “कृपालु” रहूँ तेरे सँग प्यारी,

चुटकी बजाऊँ जब जम्भुवाओ प्यारी।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३128
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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