कीर्तन 101–125
कीर्तन 124 · Kirtan 124
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
चलो बरसाने मिले बरसाने वारी,
बोलो जय होे जय हो वृषभानुदुलारी।
नित्य किशोरी ब्रजरस बोरी प्यारी।
वयस की थोरी पिय चित चोरी प्यारी,
रति रस बोरी गति मति मोरी प्यारी।
चोरी चोरी चित चोरु चित चोरी प्यारी,
तू ही तो है मोरी लखु मोरी ओरी प्यारी।
भाजि भाजि अइहै करुणामयी प्यारी।
रोके कहु मैं हूँ शिशु तू ही माँ है प्यारी,
जग हों कुपूत कुमाता नहिं प्यारी।
इक बार कहु मैं ही तेरी महतारी,
सेवा दे दे महल की दऊँगी बुहारी।
दीखेंगे बिहारी तहँ देत बुहारी।
