कीर्तन 1–50
कीर्तन 34 · Kirtan 34
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
दीनबन्धु दीनानाथ गोविन्द राधे,
दीनबन्धु दीनानाथ गोविन्द राधे,
Source page 81
गोविन्द बोले नित राधे राधे राधे,
गोविन्द गोविन्द बोले नित राधे।
ब्रज गोपी बोलें नित गोविन्द राधे,
हम बोलें नित गोपी गोविन्द राधे।
गोविन्द रोम रोम बोले नाम राधे,
गोविन्द नाम बोले रोम रोम राधे।
ब्रज की लता पता भी बोले राधे राधे,
ब्रज के चकोर मोर बोले राधे राधे।
भुक्ति मुक्ति माँगूँ नहिं गोविन्द राधे,
बैकुण्ठ माँगूँ नहिं गोविन्द राधे।
रिद्धि सिद्धि माँगूँ नहिं गोविन्द राधे,
पाँचों मुक्ति माँगूँ नहिं गोविन्द राधे।
सातों स्वर्ग माँगूँ नहिं गोविन्द राधे,
तेरा सुख माँगूँ नित गोविन्द राधे।
Source page 82
तू ही तो है मेरा सुत गोविन्द राधे,
तू ही तो है मेरा पिय गोविन्द राधे।
तू ही तो है मेरी गति गोविन्द राधे,
तू ही तो है मेरा धन गोविन्द राधे।
तोहिं तजि जाऊँ कित गोविन्द राधे,
तू ही मेरा मैं भी तेरा गोविन्द राधे,
“रा” को सुनि घूरे श्याम गोविन्द राधे,
“धे” को सुनि भाजे ढिग जो भी बोले राधे।
