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ब्रज रस माधुरी

PART III · KIRTAN 34 · 38/129

कीर्तन 1–50

कीर्तन 34 · Kirtan 34

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

39 source linesपुस्तक पृष्ठ 80–82PDF 91–93

दीनबन्धु दीनानाथ गोविन्द राधे,

(प्यारी प्यारी भोरी भारी ...)

दीनबन्धु दीनानाथ गोविन्द राधे,

मेरे प्राण वल्लभ गोविन्द राधे।

गोपीजन वल्लभ गोविन्द राधे,

मेरे जीवन धन गोविन्द राधे।

ब्रज रस अम्बुधि गोविन्द राधे,

प्रेम सुधा निधि गोविन्द राधे।

मेरे दोऊ ठाकुर गोविन्द राधे,

रसिक मुकुट मणि गोविन्द राधे।

Source page 81

रसिक जनन धन गोविन्द राधे,

ब्रजरस मूरति गोविन्द राधे।

गोविन्द बोले नित राधे राधे राधे,

गोविन्द गोविन्द बोले नित राधे।

ब्रज गोपी बोलें नित गोविन्द राधे,

हम बोलें नित गोपी गोविन्द राधे।

गोविन्द रोम रोम बोले नाम राधे,

गोविन्द नाम बोले रोम रोम राधे।

ब्रज की लता पता भी बोले राधे राधे,

ब्रज के चकोर मोर बोले राधे राधे।

भुक्ति मुक्ति माँगूँ नहिं गोविन्द राधे,

बैकुण्ठ माँगूँ नहिं गोविन्द राधे।

रिद्धि सिद्धि माँगूँ नहिं गोविन्द राधे,

पाँचों मुक्ति माँगूँ नहिं गोविन्द राधे।

सातों स्वर्ग माँगूँ नहिं गोविन्द राधे,

तेरा सुख माँगूँ नित गोविन्द राधे।

तू ही तो है मेरा स्वामी गोविन्द राधे,

तू ही तो है मेरा सखा गोविन्द राधे।

Source page 82

तू ही तो है मेरा सुत गोविन्द राधे,

तू ही तो है मेरा पिय गोविन्द राधे।

तू ही तो है मेरी गति गोविन्द राधे,

तू ही तो है मेरा धन गोविन्द राधे।

तोहिं तजि जाऊँ कित गोविन्द राधे,

पतितन सुनै कौन गोविन्द राधे।

तू ही मेरा मैं भी तेरा गोविन्द राधे,

झलक दिखा दे टुक गोविन्द राधे।

“रा” को सुनि घूरे श्याम गोविन्द राधे,

“धे” को सुनि भाजे ढिग जो भी बोले राधे।

दीनबन्धु दीनानाथ गोविन्द राधे,

सुन लो “कुपालु” की भी गोविन्द राधे।।

ब्रज रस माधुरी · भाग ३038
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 3. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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